उत्तराखंड

Uttarakhand Disaster Management: उत्तराखंड में आपदा से निपटने की बड़ी तैयारी, QRT के साथ अकाउंट और कोर टीम होगी तैनात

Uttarakhand Disaster Management: Major Preparations to Tackle Disasters in Uttarakhand; Accounts and Core Teams to be Deployed Alongside QRTs

Uttarakhand Disaster Management Department is forming QRT, account and core teams ahead of the monsoon to ensure rapid rescue, damage assessment and immediate relief distribution.

उत्तराखंड में हर वर्ष मानसून अपने साथ भारी बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और सड़क बाधित होने जैसी गंभीर चुनौतियां लेकर आता है। पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव अधिक व्यापक होता है। इसी को देखते हुए Uttarakhand Disaster Management विभाग ने इस बार मानसून से पहले तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है।

राज्य सरकार ने क्विक रिस्पांस टीम (QRT) के साथ-साथ अकाउंट टीम, रिकवरी एवं रिकंस्ट्रक्शन टीम और विभिन्न विभागों की एक कोर टीम गठित करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों को तेज करना, नुकसान का तुरंत आकलन करना और प्रभावित लोगों तक सहायता बिना देरी पहुंचाना है।

जून में दस्तक देगा मानसून, तैयारियों में जुटा प्रशासन

उत्तराखंड में सामान्यतः जून के तीसरे सप्ताह में मानसून सक्रिय हो जाता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष भी लगभग 21 जून के आसपास मानसून राज्य में प्रवेश कर सकता है। इससे पहले ही मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी कर दिया है।

बारिश की शुरुआती चेतावनियों को देखते हुए Uttarakhand Disaster Management विभाग ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami और मुख्य सचिव Anand Bardhan लगातार समीक्षा बैठकों के माध्यम से विभागीय तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं।

पिछले वर्ष की कमियों से मिली सीख

पिछले मानसून के दौरान कई क्षेत्रों में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण सड़कें बंद हुईं, गांवों का संपर्क टूटा और राहत कार्यों में कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आईं। इन अनुभवों के आधार पर इस बार Uttarakhand Disaster Management की रणनीति को अधिक संगठित और परिणामोन्मुख बनाया जा रहा है।

अधिकारियों का मानना है कि यदि विभिन्न टीमों की जिम्मेदारियां पहले से स्पष्ट हों और प्रशिक्षण समय पर पूरा हो जाए, तो आपदा के समय निर्णय लेने और राहत पहुंचाने में गति आएगी।

QRT निभाएगी सबसे अहम भूमिका

क्विक रिस्पांस टीम यानी QRT को आपदा प्रबंधन की पहली पंक्ति माना जा रहा है। पिछले वर्ष तहसील स्तर पर गठित इन टीमों ने कई स्थानों पर प्रभावी कार्य किया था। इसी सफलता को देखते हुए इस वर्ष इन टीमों को और मजबूत किया जा रहा है।

Uttarakhand Disaster Management के तहत गठित QRT में पुलिस, फायर सर्विस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आपदा मित्र, युवा स्वयंसेवक, मास्टर ट्रेनर, आपदा सखी, सेना और पूर्व सैनिकों को शामिल किया गया है। ये टीमें किसी भी आपात स्थिति में तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान शुरू करेंगी।

मानसून से पहले विशेष प्रशिक्षण

आपदा प्रबंधन सचिव Vinod Kumar Suman के अनुसार मानसून शुरू होने से पहले सभी QRT सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। तहसील स्तर पर उपलब्ध उपकरणों की प्रदर्शनी लगाकर उनके संचालन का व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Uttarakhand Disaster Management के तहत नियुक्त प्रत्येक सदस्य किसी भी परिस्थिति में आधुनिक उपकरणों का प्रभावी उपयोग कर सके।

रिकवरी और रिकंस्ट्रक्शन टीम करेगी नुकसान का आकलन

आपदा के बाद केवल राहत कार्य पर्याप्त नहीं होते, बल्कि क्षति का वैज्ञानिक मूल्यांकन और पुनर्निर्माण भी उतना ही आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से रिकवरी एवं रिकंस्ट्रक्शन टीम का गठन किया जा रहा है।

यह टीम प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करेगी, बुनियादी ढांचे के नुकसान का आकलन करेगी और पुनर्निर्माण की प्राथमिकताएं तय करेगी। इससे Uttarakhand Disaster Management को दीर्घकालिक पुनर्वास योजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी।

अकाउंट टीम करेगी तत्काल राहत वितरण

आपदा के समय आर्थिक सहायता शीघ्र पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसे ध्यान में रखते हुए विशेष अकाउंट टीम बनाई जा रही है, जो राहत राशि के लेखा-जोखा और वितरण की जिम्मेदारी संभालेगी।

इस व्यवस्था से Uttarakhand Disaster Management प्रभावित परिवारों तक मुआवजा और वित्तीय सहायता अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचा सकेगा।

हर महीने तीन बार बैठक करेगी कोर टीम

राज्य सरकार विभिन्न विभागों को मिलाकर एक कोर टीम भी गठित कर रही है। यह टीम आपदा सीजन के दौरान हर महीने 1, 11 और 21 तारीख को बैठक करेगी।

इन बैठकों में आपदा के प्रभाव, उपलब्ध संसाधनों, कमियों और सुधारात्मक रणनीतियों पर चर्चा होगी। इस समन्वित दृष्टिकोण से Uttarakhand Disaster Management को वास्तविक समय में निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।

अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी उपयोगी साबित हुई QRT

QRT केवल प्राकृतिक आपदाओं तक सीमित नहीं है। पूर्व में गैस सिलेंडर की कमी के दौरान भी इन टीमों ने निरीक्षण और कार्रवाई में प्रभावी भूमिका निभाई थी। इससे स्पष्ट है कि Uttarakhand Disaster Management के तहत विकसित यह मॉडल प्रशासन को अन्य आपात स्थितियों से निपटने में भी सक्षम बनाता है।

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