Haldwani Ring Road Project: हल्द्वानी रिंग रोड, दिल्ली की कंपनी 9 महीने में तैयार करेगी फाइनल डिजाइन, दूर होगा जाम का झंझट
Haldwani Ring Road Project: Haldwani Ring Road, Delhi company will prepare the final design in 9 months, traffic jam will be resolved
कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में सालों से नासूर बन चुकी जाम की समस्या का अब स्थाई समाधान होने जा रहा है। बहुप्रतीक्षित हल्द्वानी रिंग रोड परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली की प्रतिष्ठित कंपनी ‘एमएस सक्षम सर्वे सॉल्यूशन’ (MS Saksham Survey Solution) को इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के डिजाइन और विस्तृत सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंपनी अगले नौ महीनों के भीतर वनभूमि के आकलन से लेकर सड़क की जद में आने वाले हजारों पेड़ों की गणना और परियोजना की कुल लागत की फाइनल रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
7 साल का इंतजार और अब ‘रफ्तार’ की बारी
हल्द्वानी में वाहनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए अप्रैल 2017 में रिंग रोड का प्रस्ताव तैयार किया गया था। शुरुआत में 51 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट को चार हिस्सों में बांटा गया था, लेकिन कई तकनीकी कारणों और स्थानीय विरोध के चलते इसमें समय-समय पर बदलाव किए गए।
अब अगस्त 2024 में शासन स्तर पर हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद इस प्रोजेक्ट के नए स्वरूप पर मुहर लगी है। नया प्लान लामाचौड़ से रामपुर रोड तक यातायात को डायवर्ट करने पर केंद्रित है, ताकि कालाढूंगी और रामपुर की ओर से आने वाले वाहनों को शहर के भीतर फंसे बिना एक वैकल्पिक बाईपास मिल सके।
ग्रामीणों के विरोध के बाद ‘जंगल’ से गुजरेगा रास्ता
प्रोजेक्ट के शुरुआती सर्वे में रिंग रोड को ग्रामीण क्षेत्रों और घनी आबादी के बीच से निकालने का विचार था। लेकिन उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण और ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद सरकार ने निर्णय बदला है। अब यह तय हुआ है कि आबादी को बचाने के लिए सड़क को आबादी से सटे जंगल (Forest Line) से निकाला जाएगा।
-
नया रूट: रिंग रोड भाखड़ा पुल से शुरू होकर फायर लाइन के रास्ते होते हुए रामपुर रोड पर बेलबाबा के पास मिलेगी।
-
बजट की मंजूरी: शासन ने सर्वे और तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 26.35 लाख रुपये का प्रारंभिक बजट भी जारी कर दिया है।
तीन राज्यों की कंपनियों के बीच था मुकाबला
ईई लोनिवि प्रत्यूष कुमार के अनुसार, इस सर्वे प्रोजेक्ट के टेंडर में हरियाणा, दिल्ली और पंजाब की तीन बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया था। तकनीकी और वित्तीय बोलियों (Technical & Financial Bids) के गहन परीक्षण के बाद दिल्ली की ‘एमएस सक्षम सर्वे सॉल्यूशन’ के नाम पर मुहर लगी है। अब वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद कंपनी को नौ महीने की सख्त समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
दिल्ली तक जाएगा प्रस्ताव
जंगल से सड़क निकालने की प्रक्रिया काफी जटिल है। कंपनी की रिपोर्ट मिलने के बाद ऑनलाइन आवेदन के जरिए वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रस्ताव देहरादून स्थित नोडल अधिकारी और वन संरक्षक से होते हुए अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय वन मंत्रालय (दिल्ली) भेजा जाएगा।
56 हेक्टेयर जमीन की तलाश
लोनिवि द्वारा किए गए एक शुरुआती (In-house) सर्वे के अनुसार, इस रिंग रोड के निर्माण के लिए लगभग 56 हेक्टेयर वनभूमि के अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। इसमें करीब 4280 पेड़ों का कटान संभावित है।
-
क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण: नियमानुसार, जितनी वनभूमि का उपयोग सड़क के लिए होगा, राज्य सरकार को उसकी दोगुनी जमीन तलाशनी होगी जहाँ नए पौधे लगाए जा सकें। इसे पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Compensatory Afforestation) कहा जाता है।
-
लागत का अनुमान: शुरुआती स्तर पर सड़क निर्माण का खर्च 172 करोड़ रुपये आंका गया था, लेकिन दिल्ली की कंपनी के फाइनल सर्वे के बाद यह लागत बढ़ सकती है।
परियोजना का संक्षिप्त विवरण (तालिका):
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
| सर्वे कंपनी | एमएस सक्षम सर्वे सॉल्यूशन (दिल्ली) |
| सर्वे की अवधि | 09 महीने |
| संभावित वनभूमि | 56 हेक्टेयर |
| अनुमानित पेड़ | 4280 (लगभग) |
| प्रारंभिक बजट | ₹172 करोड़ (निर्माण हेतु) |
| मुख्य मार्ग | भाखड़ा पुल से बेलबाबा (रामपुर रोड) तक |

