Almora Forest Fire: अल्मोड़ा के जंगलों में तांडव, चौकुनी और उपराड़ी के वन क्षेत्र धधके, हाईवे तक पहुँची आग की लपटें!
Almora Forest Fire: Forest areas of Chaukuni and Upradi blazed in the forests of Almora, flames reached the highway!
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है और वातावरण में नमी कम हो रही है, जंगलों की आग (Forest Fire) एक बार फिर डराने लगी है। अल्मोड़ा जिले के दो महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों चौकुनी और उपराड़ी में बीती रात भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि इसकी लपटें रानीखेत और द्वाराहाट जाने वाले मुख्य राजमार्गों तक पहुँच गईं, जिससे न केवल यातायात प्रभावित हुआ बल्कि बहुमूल्य वन संपदा को भी भारी क्षति पहुँची है।
खैरना-रानीखेत और द्वाराहाट-कर्णप्रयाग हाईवे प्रभावित
अल्मोड़ा जिले में आग की दो बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। पहली घटना खैरना-रानीखेत स्टेट हाईवे पर स्थित उपराड़ी के जंगलों में हुई, जहाँ अचानक उठी लपटों ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। वहीं दूसरी ओर, द्वाराहाट-कर्णप्रयाग हाईवे पर स्थित चौकुनी वन क्षेत्र भी आग की चपेट में आ गया।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात के अंधेरे में आग की लपटें कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रही थीं। द्वाराहाट हाईवे पर घिंघारीखाल तिराहा के पास आग इतनी भीषण थी कि वह सड़क के किनारे तक आ गई, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों में दहशत फैल गई।
10 हेक्टेयर जंगल राख, करोड़ों की वन संपदा नष्ट
प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, इन दोनों घटनाओं में लगभग 5 से 10 हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो गया है। आग की इस चपेट में आने से न केवल छोटे पौधे और झाड़ियाँ नष्ट हुई हैं, बल्कि वन्यजीवों के आवास भी उजड़ गए हैं। देवदार और चीड़ के जंगलों में आग लगने से वातावरण में धुएं का गुबार छा गया है, जिससे निकटवर्ती गांवों में लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
अंदेशा जताया जा रहा है कि निचले भूभागों में ग्रामीणों द्वारा खरपतवार या सूखी घास जलाने के दौरान उठी चिंगारी से यह आग भड़की और हवा के साथ ऊपर के घने जंगलों तक फैल गई।
दमकल कर्मियों की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा
चौकुनी के जंगलों में जब आग बेकाबू होने लगी, तो स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित किया। दमकल विभाग की टीम ने रात के चुनौतीपूर्ण समय में मोर्चा संभाला। लीड फायरमैन खीमानंद के नेतृत्व में बलवंत सिंह, विक्रांत सिंह और भास्कर चंद्र की टीम ने पानी की तेज बौछारों से घंटों की मशक्कत के बाद सड़क के किनारे लगी आग पर काबू पाया। यदि समय रहते दमकल की गाड़ियाँ नहीं पहुँचतीं, तो आग पास की बस्तियों तक पहुँच सकती थी।
वन विभाग की सख्त चेतावनी
जंगलों की इस लगातार भड़कती आग पर वन क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जंगलों में आग लगना न केवल पर्यावरणीय क्षति है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है।
उन्होंने ग्रामीणों और पर्यटकों से अपील की है कि:
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जंगलों के पास कूड़ा या खरपतवार न जलाएं।
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पिकनिक के दौरान जलाई गई आग को पूरी तरह बुझाकर ही वापस आएं।
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जलती हुई बीड़ी या सिगरेट के टुकड़े जंगल में न फेंकें।
मिश्रा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर जंगल में आग लगाता हुआ या आग भड़काता हुआ पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी और उसे जेल भी भेजा जा सकता है।
उत्तराखंड में जंगल की आग
पर्वतीय क्षेत्रों में मार्च और अप्रैल का महीना ‘फायर सीजन’ माना जाता है। इस दौरान सूखी पत्तियों (विशेषकर चीड़ की पत्तियों) के कारण आग तेजी से फैलती है। अल्मोड़ा की यह घटना पूरे प्रदेश के लिए एक अलर्ट है कि नमी कम होते ही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को ‘रेड मोड’ पर रहने की आवश्यकता है।
घटना का संक्षिप्त विवरण (तालिका):
| प्रभावित क्षेत्र | राजमार्ग का नाम | नुकसान का अनुमान | मुख्य कारण (अंदेशा) |
| उपराड़ी वन क्षेत्र | खैरना-रानीखेत स्टेट हाईवे | 5-7 हेक्टेयर | खरपतवार जलाना |
| चौकुनी वन क्षेत्र | द्वाराहाट-कर्णप्रयाग हाईवे | 4-5 हेक्टेयर | मानवीय लापरवाही |
| घिंघारीखाल तिराहा | द्वाराहाट हाईवे | सड़क किनारे की वनस्पति | अज्ञात चिंगारी |



