Haridwar Kumbh 2026: ‘देव डोलियों’ के संगम से दिव्य होगी गंगा सभा, 700 डोलियों के शाही स्नान की तैयारी शुरू
Haridwar Kumbh 2026: The confluence of 'Dev Dolis' will make the Ganga Sabha divine, preparations begin for the royal bath of 700 dolis.
धर्मनगरी हरिद्वार में आगामी कुंभ मेले को लेकर तैयारियां अब अपने चरम पर हैं। इस बार का कुंभ न केवल नागा साधुओं और अखाड़ों के शाही स्नान के लिए जाना जाएगा, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का भी गवाह बनेगा। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के सुदूर पहाड़ों से उतरकर आने वाली ‘देव डोलियां’ (Dev Doli) इस महाकुंभ का मुख्य आकर्षण केंद्र होंगी। मेला प्रशासन ने इन डोलियों के भव्य स्वागत, शोभायात्रा और गंगा स्नान के लिए रणनीतिक खाका तैयार करना शुरू कर दिया है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का अनूठा संगम
हरिद्वार के मेला नियंत्रण भवन (CCR) में मेलाधिकारी सोनिका की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें देव डोलियों के आगमन की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य कुंभ की भव्यता को उत्तराखंड की लोक परंपराओं के साथ जोड़ना है। मेलाधिकारी सोनिका ने कहा कि कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का एक बड़ा मंच है।
इस बार कुंभ में उत्तराखंड के विभिन्न अंचलों से लगभग 500 से 700 देव डोलियां हरिद्वार पहुँचने की उम्मीद है। ये डोलियां अपने साथ पहाड़ों की अटूट आस्था और सदियों पुरानी परंपराएं लेकर आएंगी, जिससे देश-दुनिया के श्रद्धालु रूबरू हो सकेंगे।
शाही मार्ग और पड़ाव स्थलों पर मंथन
बैठक में देव डोलियों के स्नान की तिथि, शोभायात्रा के रूट और उनके ठहरने की व्यवस्थाओं को लेकर गहन मंथन किया गया।
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शोभायात्रा का मार्ग: प्रशासन एक ऐसे मार्ग का चयन कर रहा है जहाँ से श्रद्धालु डोलियों के सुगमता से दर्शन कर सकें और यातायात में भी बाधा न आए।
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पड़ाव स्थल: पहाड़ों से आने वाली टोलियों और उनके साथ चलने वाले ध्याणियों (भक्तों) के रुकने के लिए विशेष शिविरों का निर्माण किया जाएगा।
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पारंपरिक व्यवस्थाएं: डोलियों का स्वागत पारंपरिक वाद्य यंत्रों (ढोल-दमाऊ, रणसिंगा) के साथ करने की योजना है, ताकि वातावरण पूरी तरह देवमय हो जाए
जल्द होगी तिथियों की घोषणा
श्रद्धालुओं और मंदिर समितियों के बीच सबसे बड़ा सवाल ‘स्नान की तिथि’ को लेकर है। मेला प्रशासन के अनुसार, ज्योतिषीय गणना और शुभ मुहूर्त के आधार पर जल्द ही देव डोलियों के स्नान और शोभायात्रा की आधिकारिक तिथियों की घोषणा की जाएगी। अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने बताया कि पहले चरण की बैठक में स्वरूप और रूट पर चर्चा हुई है, अब अंतिम निर्णय के लिए विभिन्न समितियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी का विजन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर कुंभ को ‘भव्य एवं दिव्य’ बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। लैंसडाउन विधायक दिलीप रावत ने बताया कि मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से इन तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि जिस तरह कुंभ में अखाड़ों का महत्व है, उसी तरह उत्तराखंड की स्थानीय देव संस्कृति को भी उचित सम्मान और स्थान मिले।
इसके लिए एक विशेष व्यवस्था की गई है गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के लिए अलग-अलग संयोजक नियुक्त किए जाएंगे। ये संयोजक स्थानीय मंदिर समितियों और प्रशासन के बीच सेतु का काम करेंगे, ताकि डोलियों के आगमन से लेकर प्रस्थान तक कोई असुविधा न हो।
वैश्विक मंच पर दिखेगी ‘पहाड़ी’ संस्कृति
हरिद्वार कुंभ 2026 में केवल स्नान ही नहीं, बल्कि लोक संस्कृति पर आधारित कई बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। देव डोलियों की उपस्थिति से विदेशी पर्यटकों को भी उत्तराखंड के “देवभूमि” होने के वास्तविक अर्थ का बोध होगा। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हमारी लुप्त होती कुछ लोक परंपराओं को भी नया जीवन मिलेगा।

