उत्तराखंड

Uttarakhand में दोहरी पेंशन पर सख्ती, CM Dhami ने दिए सत्यापन और कार्रवाई के निर्देश

Strict action on double pension in Uttarakhand, CM Dhami gave instructions for verification and action

देहरादून: Uttarakhand सरकार ने दोहरी पेंशन के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। CM Dhami ने उन मामलों के व्यापक सत्यापन और आवश्यक कानूनी कार्रवाई को मंजूरी दे दी है, जिनमें सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत भी पेंशन ले रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों के विरुद्ध किसी भी प्रकार का वित्तीय लाभ स्वीकार्य नहीं होगा।

ऑडिट रिपोर्ट से सामने आई अनियमितता

मामला तब प्रकाश में आया जब महालेखाकार (लेखा परीक्षा) की समीक्षा में पेंशन वितरण से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। जांच में संकेत मिले कि कई लाभार्थी सरकारी सेवा से रिटायरमेंट पेंशन लेने के बावजूद वृद्धावस्था या विधवा पेंशन का भी लाभ उठा रहे हैं। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, एक हजार से अधिक मामलों में दोहरी भुगतान की स्थिति पाई गई। इस पर मुख्य सचिव और वित्त विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया।

समाज कल्याण विभाग की राज्यव्यापी जांच

रिपोर्ट के बाद समाज कल्याण विभाग ने सभी जिलों को रिकॉर्ड की पुनः जांच के निर्देश दिए। विभागीय स्तर पर सरकारी सेवानिवृत्ति डेटा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों का मिलान किया गया। जांच में सैकड़ों ऐसे नाम सामने आए, जिनकी पात्रता संदिग्ध पाई गई। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में डेटा समन्वय की कमी कारण बनी, जबकि कुछ प्रकरणों में नियमों की अनदेखी भी हो सकती है।

मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि जनकल्याण योजनाओं में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया है, उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, संबंधित विभागों की जवाबदेही भी तय की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

नियमों के तहत पात्रता की शर्तें

राज्य के नियमों के अनुसार, जो व्यक्ति सरकारी सेवा से नियमित पेंशन प्राप्त कर रहा है, वह सामाजिक सुरक्षा पेंशन का पात्र नहीं होता। वृद्धावस्था और विधवा पेंशन का उद्देश्य उन नागरिकों को सहायता देना है, जिनके पास आय का स्थायी स्रोत नहीं है। दोहरी पेंशन की स्थिति से सरकारी संसाधनों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है और वास्तविक जरूरतमंदों का हक प्रभावित हो सकता है।

भविष्य के लिए डिजिटल निगरानी

सरकार अब पेंशन वितरण प्रणाली को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। विभागों के बीच डिजिटल डेटा इंटीग्रेशन और नियमित ऑडिट व्यवस्था लागू करने की योजना है। जिला स्तर पर निगरानी तंत्र को सक्रिय किया जाएगा, ताकि पात्रता की समय-समय पर समीक्षा हो सके।

राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए उठाया गया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

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