उत्तराखंड

चारधाम यात्रा 2026: पंजीकरण पर टोकन शुल्क लागू करने की तैयारी

Token fee to be imposed on registration

देहरादून/ऋषिकेश: उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा 2026 के लिए पंजीकरण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का संकेत दिया है। अब तक निःशुल्क रहने वाला ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इस बार टोकन शुल्क के साथ किया जा सकता है। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य फर्जी बुकिंग और ‘नो-शो’ की समस्या पर रोक लगाना है, ताकि वास्तविक श्रद्धालुओं को प्राथमिकता मिल सके।

गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में होटल एसोसिएशन और टूर-ट्रैवल प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इस प्रस्ताव पर चर्चा की। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि बड़ी संख्या में यात्री पंजीकरण तो कर लेते हैं, लेकिन यात्रा पर नहीं पहुंचते, जिससे स्लॉट खाली रह जाते हैं और व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं।

‘नो-शो’ समस्या से निपटने की पहल

पिछले वर्षों में मुफ्त पंजीकरण व्यवस्था के कारण कई बार ट्रैवल एजेंसियों या बिचौलियों द्वारा बड़ी संख्या में स्लॉट बुक कर लिए जाते थे। बाद में इनका उपयोग नहीं होता था या रद्द कर दिए जाते थे। इससे वास्तविक श्रद्धालु पंजीकरण से वंचित रह जाते थे और होटल कारोबार को भी नुकसान होता था।

प्रशासन का मानना है कि यदि नाममात्र का शुल्क लिया जाएगा तो केवल गंभीर यात्री ही पंजीकरण कराएंगे। इससे डेटा अधिक सटीक होगा और भीड़ प्रबंधन आसान होगा।

कितना हो सकता है शुल्क?

प्रारंभिक प्रस्ताव के अनुसार पंजीकरण शुल्क लगभग ₹10 रखा जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही घोषित होगा। इस विषय पर एक विशेष समिति गठित की गई है, जो शीघ्र अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। अधिकारियों का कहना है कि शुल्क प्रतीकात्मक होगा और यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालेगा।

कपाट खुलने की तिथियां घोषित

चारधाम यात्रा 2026 के लिए कपाट खुलने की तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं।

  • गंगोत्री मंदिर और यमुनोत्री मंदिर के कपाट 19 अप्रैल 2026 को खुलेंगे।
  • केदारनाथ मंदिर 22 अप्रैल 2026 से श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा।
  • बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल 2026 को खोले जाएंगे।

फिलहाल यात्रियों की संख्या पर दैनिक सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन पंजीकरण अनिवार्य रहेगा।

बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता पर जोर

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और यातायात प्रबंधन को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकेगा। होटल और स्थानीय व्यवसायियों को भी अग्रिम योजना बनाने में सुविधा मिलेगी। अचानक भीड़ बढ़ने की स्थिति में अव्यवस्था कम होगी।

पर्यटन व्यवसायियों की प्रतिक्रिया

ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों के होटल संचालकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका कहना है कि मामूली शुल्क से गंभीर यात्रियों की पहचान आसान होगी और अनावश्यक बुकिंग कम होंगी। कुछ लोगों ने सुझाव दिया है कि पंजीकरण पोर्टल को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाए, ताकि भारी ट्रैफिक के दौरान वेबसाइट प्रभावित न हो।

चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी है। ऐसे में टोकन शुल्क व्यवस्था को आस्था और प्रशासन के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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