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विवाहेतर संबंध और लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त कानून की मांग, अशोक बालियान ने गृह मंत्री को लिखा पत्र

Ashok Baliyan writes to the Home Minister demanding strict laws on extramarital affairs and live-in relationships.

पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने देश में विवाह संस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार से कड़े कानूनी प्रावधान लाने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा है कि विवाह भारतीय समाज की आधारभूत संस्था है, जो सामाजिक संतुलन और पारिवारिक व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पत्र में उन्होंने चिंता जताई कि हाल के वर्षों में विवाहेतर संबंधों और लिव-इन रिलेशनशिप की बढ़ती प्रवृत्ति से पारिवारिक विवाद, मानसिक तनाव और गंभीर आपराधिक घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। उनका कहना है कि इन परिस्थितियों ने समाज के सामने नई कानूनी और सामाजिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली कानूनी स्थिति

अशोक बालियान ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि पूर्व में व्यभिचार से संबंधित कानून को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा चुका है। इसी तरह लिव-इन रिलेशनशिप को भी भारतीय कानून में अपराध नहीं माना गया है।

उनका तर्क है कि बदलती कानूनी व्यवस्था के बाद पारिवारिक विवादों और आपराधिक घटनाओं में वृद्धि की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। समाचार माध्यमों में प्रतिदिन ऐसे मामले देखे जा सकते हैं, जिनमें पति-पत्नी या अन्य संबंधों के बीच गंभीर अपराध घटित हो रहे हैं। इससे बच्चों के भविष्य और सामाजिक ताने-बाने पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।


इंडोनेशिया का उदाहरण दिया

पत्र में उन्होंने इंडोनेशिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की संसद ने दिसंबर 2022 में एक नई आपराधिक संहिता पारित की, जिसमें विवाह के बाहर यौन संबंध और सहजीवन (लिव-इन) को अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

उन्होंने सुझाव दिया कि भारत में भी इस विषय पर गंभीर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए और विवाह संस्था की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त केंद्रीय कानूनी ढांचे की संभावना का अध्ययन किया जाना चाहिए।


काउंसलिंग और मध्यस्थता तंत्र मजबूत करने की मांग

अशोक बालियान ने केवल दंडात्मक प्रावधानों की ही नहीं, बल्कि सुधारात्मक उपायों की भी वकालत की है। उन्होंने विवाहेतर संबंधों से जुड़े विवादों में काउंसलिंग, मध्यस्थता और पारिवारिक न्याय तंत्र को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की है।

इसके अलावा उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर बढ़ रही आपराधिक घटनाओं का राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन कराया जाए और विशेषज्ञ समिति गठित कर नीति संबंधी सिफारिशें तैयार की जाएं।


जनजागरूकता अभियान पर जोर

पत्र में पारिवारिक मूल्यों, वैवाहिक जिम्मेदारियों और सामाजिक संतुलन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का भी आग्रह किया गया है। साथ ही घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न और पारिवारिक अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष कानूनी उपायों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

अशोक बालियान ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस संवेदनशील विषय पर व्यापक चर्चा कर संतुलित और दूरदर्शी निर्णय लेगी, जिससे परिवार संस्था मजबूत हो और समाज में स्थिरता बनी रहे।

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