उत्तराखंड

13 साल बाद फिर खुलेगा केदारनाथ का पुराना पैदल मार्ग, 2026 की यात्रा होगी ज्यादा सुरक्षित

After 13 years, the old Kedarnath trekking route will reopen, making the 2026 pilgrimage much safer.

देहरादून: विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वर्ष 2026 एक ऐतिहासिक सौगात लेकर आ रहा है। वर्ष 2013 की भीषण आपदा में पूरी तरह नष्ट हो चुका गौरीकुंड–रामबाड़ा–गरुड़चट्टी होकर केदारनाथ जाने वाला पारंपरिक पैदल मार्ग अब दोबारा तैयार कर लिया गया है। करीब 13 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इस मार्ग के खुलने से यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित हो जाएगी।

2013 की आपदा में बह गया था सदियों पुराना रास्ता

16 और 17 जून 2013 को आई विनाशकारी आपदा ने केदारघाटी की तस्वीर बदल दी थी। उस दौरान गौरीकुंड से रामबाड़ा और गरुड़चट्टी होते हुए केदारनाथ पहुंचने वाला पुराना पैदल मार्ग पूरी तरह तबाह हो गया था। इसके बाद श्रद्धालुओं को वैकल्पिक रास्तों से यात्रा करनी पड़ी, जहां दूरी अधिक होने के साथ-साथ सुविधाएं भी सीमित थीं। लंबे समय से इस मार्ग के पुनर्निर्माण की मांग की जा रही थी।

दो चरणों में पूरा हुआ पुनर्निर्माण कार्य

लोक निर्माण विभाग गुप्तकाशी ने इस मार्ग का पुनर्निर्माण चरणबद्ध तरीके से पूरा किया है। पहले चरण में केदारनाथ से गरुड़चट्टी तक लगभग 3.3 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण किया गया। इसके बाद सबसे अधिक क्षतिग्रस्त रहे गरुड़चट्टी से रामबाड़ा तक 5.3 किलोमीटर लंबे मार्ग को नए सिरे से विकसित किया गया। निर्माण के दौरान आधुनिक तकनीक और पहाड़ी भूगोल को ध्यान में रखा गया है, जिससे रास्ता पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाया गया है।

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर खास ध्यान

नए पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई इंतजाम किए गए हैं। रास्ते में पेयजल, रेन शेल्टर, बैठने की जगह और मजबूत रेलिंग लगाई जा रही है। खराब मौसम की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित ठहराव मिल सके, इसके लिए जगह-जगह शेड बनाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की यात्रा को आसान बनाने पर विशेष फोकस किया गया है।

अब केदारनाथ यात्रा के लिए मिलेंगे दो विकल्प

पुराने मार्ग के खुलने के बाद श्रद्धालुओं के पास पैदल यात्रा के लिए दो रास्तों का विकल्प होगा। एक ओर पारंपरिक गौरीकुंड–रामबाड़ा–गरुड़चट्टी–केदारनाथ मार्ग रहेगा, वहीं दूसरा मौजूदा गौरीकुंड–लिंचोली–केदारनाथ मार्ग भी संचालित रहेगा। हालांकि भौगोलिक बदलावों के कारण नए मार्ग पर दूरी थोड़ी बढ़ी है, लेकिन इसे अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।

2026 यात्रा सीजन से शुरू होगी आवाजाही

लोक निर्माण विभाग के अनुसार वर्ष 2026 के यात्रा सीजन से इस मार्ग पर विधिवत आवाजाही शुरू कर दी जाएगी। इससे यात्रा का दबाव बंटेगा, भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी। साथ ही रामबाड़ा और गरुड़चट्टी क्षेत्र में स्थानीय रोजगार और व्यापार को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

आस्था के साथ विकास का नया अध्याय

13 साल बाद पुराने पैदल मार्ग का पुनर्जीवित होना केदारनाथ यात्रा के इतिहास में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। यह कदम न सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था की राह को आसान बनाएगा, बल्कि 2013 की आपदा के बाद उजड़ चुके इलाकों में फिर से रौनक लौटाने का माध्यम भी बनेगा।

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