उत्तराखंड में प्रॉपर्टी डिजिटाइजेशन से बदली तस्वीर, ऑनलाइन टैक्स से 136% बढ़ा राजस्व
Property digitization transforms the landscape in Uttarakhand, online tax collection leads to a 136% increase in revenue
देहरादून: उत्तराखंड शहरी विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर में प्रॉपर्टी डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। पहले चरण में इस योजना के बेहद सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं, खासतौर पर राजस्व के मामले में। अब विभाग दूसरे चरण की तैयारी में जुट गया है, जिसमें इस पूरी प्रक्रिया को भारत सरकार के पोर्टल से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता भी और मजबूत होगी।
107 नगर निकायों में पूरा हुआ पहला चरण
शहरी विकास विभाग ने प्रदेश के सभी 107 नगर निकायों में संपत्तियों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू की थी। निदेशक शहरी विकास विनोद गोस्वामी ने बताया कि पहले चरण का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में विभाग के नगर सेवा पोर्टल के माध्यम से 14 नगर निकायों में प्रॉपर्टी टैक्स को पूरी तरह ऑनलाइन किया गया। इसके बाद सामने आए आंकड़ों ने साफ कर दिया कि डिजिटल व्यवस्था से राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
ड्रोन सर्वे से मिली वास्तविक जानकारी
विनोद गोस्वामी के अनुसार, सभी नगर निकायों में ड्रोन के जरिए प्रॉपर्टी सर्वे किया गया। ड्रोन सर्वे के बाद सामने आए वास्तविक डाटा का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया गया। इसके आधार पर संपत्ति मालिकों को नोटिस भेजे गए, आपत्तियां ली गईं और फिर दोबारा रिएसेसमेंट व जनसुनवाई का मौका दिया गया। इसके बाद टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया पूरी की गई, जिससे राजस्व में इजाफा हुआ। देहरादून, हरिद्वार और रुद्रपुर जैसे बड़े नगर निकायों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
दूसरे चरण में ‘उपयोग पोर्टल’ से होगी निगरानी
निदेशक शहरी विकास ने बताया कि अब दूसरे चरण में प्रॉपर्टी डिजिटाइजेशन को भारत सरकार के ‘उपयोग पोर्टल’ के अंतर्गत आगे बढ़ाया जाएगा। ड्रोन सर्वे की मैपिंग का काम चल रहा है और इसके पूरा होते ही संपत्तियों की निगरानी और टैक्स व्यवस्था और अधिक सटीक हो जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे कर चोरी पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
टैक्स डिजिटाइजेशन से रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी
प्रॉपर्टी टैक्स को ऑनलाइन किए जाने के बाद शहरी विकास विभाग के राजस्व में बड़ा उछाल देखा गया है। जनवरी 2019 से दिसंबर 2022 तक प्रॉपर्टी टैक्स से जहां 6.78 करोड़ रुपये की आय हुई थी, वहीं जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच यह बढ़कर 16.06 करोड़ रुपये हो गई, यानी करीब 136.87 प्रतिशत की वृद्धि।
इसी तरह ट्रेड लाइसेंस से होने वाला राजस्व 3.46 करोड़ से बढ़कर 5.19 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि मिसलेनियस टैक्स में इस अवधि के दौरान हल्की गिरावट दर्ज की गई है।
पारदर्शिता के साथ जनता को मिलेगा लाभ
विनोद गोस्वामी ने कहा कि डिजिटाइजेशन से न सिर्फ राजस्व बढ़ा है, बल्कि सिस्टम अधिक पारदर्शी भी हुआ है। बढ़े हुए राजस्व का सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए केंद्र सरकार के एक सॉफ्टवेयर को आईटीडीए द्वारा उत्तराखंड के अनुसार तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले एक महीने के भीतर इसे लॉन्च कर दिया जाएगा, जिससे लोगों को कई सेवाएं ऑनलाइन और परेशानी मुक्त मिल सकेंगी।
कुल मिलाकर, प्रॉपर्टी डिजिटाइजेशन उत्तराखंड के शहरी निकायों में टैक्स व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।

