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चक्रवात मोंथा का कहर: आंध्र तट पर भारी तबाही के बाद कमजोर पड़ा तूफान

Cyclone Motha's rampage: The storm weakened after causing widespread destruction along the Andhra coast.

बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात मोंथा (Cyclone Montha) मंगलवार शाम को आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से टकराया, जिससे तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मच गई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह तूफान काकीनाडा के पास मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच तट से टकराया। मंगलवार रात शुरू हुई लैंडफॉल प्रक्रिया देर रात तक चली और इसके कुछ घंटों बाद यह तूफान कमजोर होकर गहरे दबाव में बदल गया। हालांकि, इसका असर अब भी ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में देखा जा रहा है।


76 हजार लोग हुए सुरक्षित स्थानांतरित

सरकार की तैयारियों की बदौलत हजारों लोगों की जान बचाई जा सकी। राज्य प्रशासन ने तूफान के पहले ही 76,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचा दिया था। 219 चिकित्सा शिविर और 865 टन पशु चारे की व्यवस्था की गई है। कृष्णा, एलुरु और काकीनाडा जिलों में एहतियात के तौर पर रात में वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई थी। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि प्राथमिकता लोगों की जान बचाने पर रही, जिसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।


रेल और हवाई सेवाएं ठप, कई ट्रेनें और फ्लाइट्स रद्द

तूफान के चलते परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। दक्षिण मध्य रेलवे ने दो दिनों में 120 से अधिक ट्रेनें रद्द कीं और पूर्वी तटीय रेलवे ने कई ट्रेनों का रूट बदला। वहीं, विशाखापट्टनम और विजयवाड़ा हवाई अड्डों से कई उड़ानें रद्द की गईं। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि मौसम सामान्य होते ही ट्रैक निरीक्षण के बाद सेवाएं बहाल की जाएंगी।


कृषि को भारी नुकसान, लाखों हेक्टेयर फसलें बर्बाद

चक्रवात ने राज्य की कृषि को भी गहरा नुकसान पहुंचाया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, करीब 1.76 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसमें धान, केले और नारियल की फसलें प्रमुख हैं। कोनासीमा जिले में एक महिला की मौत तब हुई जब उसके घर पर तेज हवाओं से उखड़ा ताड़ का पेड़ गिर गया। सरकार ने नुकसान का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है और प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा देने का वादा किया है।


ओडिशा और गुजरात में भी दिखा असर

तूफान कमजोर पड़ने के बावजूद ओडिशा और गुजरात तक इसका प्रभाव देखा गया। ओडिशा के गंजम और गजपति जिलों में भारी बारिश और तेज़ हवाएं जारी हैं। गोपालपुर और पूरी में समुद्र की लहरें ऊंची उठ रही हैं। ओडिशा सरकार ने एहतियात के तौर पर 11,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। गुजरात के ऊना क्षेत्र में भी भारी वर्षा दर्ज की गई है।


रेड अलर्ट और राहत कार्य जारी

आईएमडी ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है और मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी दी है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हैं। बिजली और संचार सेवाओं को बहाल करने का काम तेजी से किया जा रहा है। समय पर की गई तैयारियों और राहत कार्यों के चलते बड़ी जनहानि से बचा जा सका। सरकार अब पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि प्रभावित लोग जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें।

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