उत्तराखंड

कुमाऊं में बढ़ते साइबर अपराध पर नकेल, पुलिस अब लोकभाषा में चलाएगी जागरूकता अभियान

To curb the increasing cyber crime in Kumaon, police will now run awareness campaigns in local language

हल्द्वानी: इंटरनेट और मोबाइल ने लोगों की जिंदगी को आसान जरूर बना दिया है, लेकिन इसी तकनीक का इस्तेमाल अब साइबर अपराधी धोखाधड़ी के लिए कर रहे हैं। कुमाऊं क्षेत्र में पिछले कुछ समय से साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हालात ऐसे हैं कि पढ़े-लिखे और जागरूक लोग भी इनके जाल में फंसकर अपनी जमा-पूंजी गंवा रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए अब पुलिस ने एक नया कदम उठाया है।

कुमाऊंनी और पहाड़ी भाषा में संदेश

कुमाऊं मंडल के आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि अब साइबर अपराध को लेकर जनजागरूकता अभियान कुमाऊंनी और अन्य स्थानीय भाषाओं में चलाया जाए। पुलिस का मानना है कि पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कई लोग हिंदी या अंग्रेजी में जारी संदेशों को सही से नहीं समझ पाते, जिससे वे आसानी से साइबर ठगों के शिकार हो जाते हैं। इस बार सोशल मीडिया पोस्ट, पोस्टर, ऑडियो और वीडियो के जरिए कुमाऊंनी भाषा में लोगों को सतर्क किया जाएगा।

बुजुर्ग और रिटायर्ड लोग ठगों के आसान शिकार

साइबर अपराधी खासतौर पर उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो तकनीक से ज्यादा परिचित नहीं हैं। बुजुर्ग और सेवानिवृत्त कर्मचारी इनके सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं। ठग नौकरी दिलाने, बैंकिंग अपडेट, फर्जी कॉल, अंजान लिंक, ओटीपी या केस में फंसाने जैसी तरकीबों से भोले-भाले लोगों को जाल में फंसाकर लाखों रुपये चंद सेकेंड में हड़प लेते हैं। पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों में हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।

आंकड़े और पुलिस की चिंता

आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्ष कुमाऊं क्षेत्र में 9 से अधिक बड़े मामलों में करीब 34 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। इनमें से पुलिस ने लगभग 40 प्रतिशत रकम की रिकवरी जरूर कराई, लेकिन ज्यादातर पीड़ितों को अब तक अपना धन वापस नहीं मिल पाया। पुलिस का मानना है कि जागरूकता की कमी ही साइबर अपराधियों को लगातार मजबूत बना रही है।

जनजागरूकता ही समाधान

आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने कहा कि साइबर अपराध को रोकने के लिए लोगों का जागरूक होना सबसे ज्यादा जरूरी है। किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा नहीं करना चाहिए और किसी भी स्थिति में ओटीपी या बैंक डिटेल साझा नहीं करनी चाहिए। अब पुलिस स्थानीय भाषा में संदेश देकर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को साइबर अपराध से बचाने की कोशिश करेगी।

कुल मिलाकर, कुमाऊं पुलिस की यह पहल पहाड़ों में रहने वाले उन लोगों के लिए एक नई उम्मीद है, जो तकनीकी भाषा न समझ पाने के कारण आसानी से साइबर अपराधियों का शिकार बन जाते हैं। उम्मीद की जा रही है कि यह लोकभाषा आधारित अभियान साइबर ठगी पर रोक लगाने में मददगार साबित होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button