उत्तराखंड

उत्तराखंड में पुलों की जर्जर हालत ने बढ़ाई जनता की मुश्किलें, जान जोखिम में डालकर हो रही आवाजाही

The dilapidated condition of bridges in Uttarakhand has increased the difficulties of the people, people are travelling by putting their lives at risk

उत्तराखंड में आज़ादी के 78 साल बाद भी कई गांवों के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। नैनीताल जिले के रामनगर से लगभग 27 किलोमीटर दूर पाटकोट और उसके आगे स्थित रामपुर गांव के लगभग 800 ग्रामीण आज भी उफनती कालिगाड़ नदी को एक अस्थायी लकड़ी के पुल से पार करने को मजबूर हैं। बरसात में यह रास्ता जानलेवा बन जाता है, लेकिन विकल्प के अभाव में लोग रोजाना इसी मार्ग से अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए निकलते हैं।

स्कूली बच्चों और बीमारों के लिए भारी जोखिम

रामपुर गांव के करीब 50 से 55 स्कूली बच्चे हर दिन इसी पुल से होकर पाटकोट के राजकीय इंटर कॉलेज जाते हैं। बारिश के दिनों में फिसलन और तेज बहाव से बच्चों को स्कूल छोड़ना तक पड़ता है। ग्रामीणों को राशन, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान सिर पर उठाकर इसी रास्ते से लाना पड़ता है। कई बार बीमार व्यक्तियों को भी इसी खतरनाक पुल के सहारे अस्पताल पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि दो बार बाइक सवार इस नदी में बह भी चुके हैं।

प्रशासन ने लिया संज्ञान, लेकिन वन विभाग बनी बाधा

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए एसडीएम रामनगर प्रमोद कुमार ने पुल निर्माण की दिशा में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पक्का पुल नहीं बनता, तब तक अस्थायी पुल की मरम्मत लोक निर्माण विभाग के माध्यम से कराई जाएगी। हालांकि पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता संजय चौहान ने स्पष्ट किया कि यह इलाका वन विभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए विभाग सीधे तौर पर कार्य नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि भूमि हस्तांतरण से जुड़ा प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।

उत्तरकाशी के अगोड़ा गांव की स्थिति भी चिंताजनक

इसी तरह उत्तरकाशी जिले के अगोड़ा गांव में भी 2012 की आपदा के बाद पुल टूट गया था। तब से आज तक ग्रामीणों को घट्टूगाड नदी के ऊपर जर्जर ट्रॉली से सफर करना पड़ रहा है। संजय पंवार नामक ग्रामीण ने बताया कि ट्रॉली की रस्सी खींचने और उसमें चढ़ने-उतरने के दौरान नदी में गिरने का खतरा बना रहता है।

नई उम्मीद: DPR तैयार, जल्द निर्माण की उम्मीद

उत्तरकाशी में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अमनदीप राणा ने बताया कि घट्टूगाड में 36 मीटर स्पैन के पुल का डिजाइन और डीपीआर तैयार कर ली गई है। विभाग जल्द ही इस पर निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा।

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पुल और सड़कें जीवन रेखा का काम करती हैं। लेकिन कई इलाकों में प्रशासनिक जटिलताओं और विभागीय सीमाओं के कारण लोगों की जिंदगी लगातार जोखिम में पड़ रही है। अब देखना होगा कि यह घोषणाएं ज़मीन पर कब तक उतरती हैं।

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