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Dehradun Update: शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव करने निकले डीएलएड प्रशिक्षु,

D.El.Ed trainees went out to gherao the residence of the Education Minister

देहरादून में डीएलएड प्रशिक्षुओं का हल्ला बोल, सरकार से रोजगार की मांग

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सोमवार को एक बार फिर छात्रों के आक्रोश की गूंज से भर गई। राज्यभर से आए सैकड़ों डीएलएड प्रशिक्षु राजधानी की सड़कों पर उतर आए और शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव करने निकले। प्रशिक्षुओं की मांग है कि राज्य में शिक्षकों के रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए और डीएलएड डिग्रीधारकों को प्राथमिकता दी जाए।

बैरिकेडिंग कर पुलिस ने रोका काफिला, प्रशिक्षु बैठे धरने पर

प्रशिक्षु जैसे ही शिक्षा मंत्री के निवास की ओर बढ़े, उन्हें पुलिस बल ने पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इसके विरोध में प्रशिक्षु सड़क पर ही बैठ गए और नारेबाज़ी शुरू कर दी। उनका कहना है कि सरकार सिर्फ आश्वासन दे रही है लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

रोजगार की गारंटी और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया की मांग

डीएलएड प्रशिक्षुओं ने कहा कि उन्होंने दो साल का प्रशिक्षण इस उम्मीद में पूरा किया था कि उन्हें प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक की नौकरी मिलेगी। लेकिन सरकार न तो भर्ती प्रक्रिया शुरू कर रही है और न ही कोई स्पष्ट नीति बना रही है। प्रशिक्षु चाहते हैं कि सरकार डीएलएड धारकों के लिए अलग से भर्ती प्रक्रिया शुरू करे और उन्हें प्राथमिकता दे।

उत्तराखंड के कोने-कोने से पहुंचे प्रशिक्षु, आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शन में शामिल प्रशिक्षु अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, टिहरी, रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंहनगर सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आए थे। उनका कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

प्रशासन की सख्ती और शांति की अपील

पुलिस प्रशासन ने मौके पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया है ताकि किसी तरह की अशांति न फैले। अधिकारियों ने प्रशिक्षुओं से बातचीत कर धरना समाप्त करने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं और बातचीत से पहले ठोस आश्वासन चाहते हैं।

डीएलएड प्रशिक्षुओं का यह प्रदर्शन न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि युवा अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। सरकार के लिए यह एक चेतावनी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और विकराल रूप ले सकता है।

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