नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को लगातार चौथे सत्र में बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे बेंचमार्क सेंसेक्स 600 अंक से अधिक गिर गया और निफ्टी 23,350 के करीब पहुंच गया। इस भारी गिरावट के चलते निवेशकों को एक ही दिन में 5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
बाजार में व्यापक गिरावट: मिडकैप और स्मॉलकैप पर असर
- बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई।
- बीएसई-सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 424 लाख करोड़ रुपये से घटकर 419 लाख करोड़ रुपये रह गया।
- सेंसेक्स ने पिछले साल 27 सितंबर को 85,978.25 का रिकॉर्ड उच्च स्तर छुआ था, लेकिन अब यह 9% से अधिक नीचे आ चुका है।
बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
1. ट्रंप की टैरिफ नीति से वैश्विक अस्थिरता
- अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी स्टील और एल्यूमीनियम आयातों पर 25% नए टैरिफ लगाने की घोषणा की है।
- रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अगले सप्ताह अन्य देशों पर भी व्यापार शुल्क लगाने की योजना बना रहे हैं।
- इससे वैश्विक बाजारों में मंदी की आशंका बढ़ी है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ रहा है।
2. बाजार मूल्यांकन अब भी उच्च स्तर पर
- सुधार के बावजूद भारतीय शेयर बाजार अभी भी महंगा बना हुआ है।
- निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
3. कमजोर कॉर्पोरेट आय
- भारतीय कंपनियों की तीसरी तिमाही की आय पिछली दो तिमाहियों से थोड़ी बेहतर रही, लेकिन यह बाजार की धारणा को सुधारने में नाकाम रही।
- कमजोर आय रिपोर्ट के चलते बड़ी कंपनियों के स्टॉक्स में गिरावट देखी जा रही है।
निवेशकों के लिए आगे की रणनीति
- बाजार में अभी संभावित अस्थिरता बनी रहेगी, इसलिए लॉन्ग टर्म निवेशक मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश करें।
- वैश्विक और घरेलू संकेतों पर नजर रखना जरूरी है, खासकर अमेरिका की व्यापार नीतियों और भारतीय कंपनियों की आगामी तिमाही नतीजों पर।
- मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है, इसलिए निवेशकों को सावधानी से ट्रेडिंग करनी चाहिए।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के पीछे वैश्विक अस्थिरता, ट्रंप की टैरिफ नीति, ऊंचा बाजार मूल्यांकन और कमजोर कॉर्पोरेट आय प्रमुख कारण हैं। निवेशकों को सतर्क रहने और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह दी जाती है।

