चैत्र नवरात्रि 2026: ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंजी धर्मनगरी हरिद्वार, मां शैलपुत्री के दर्शन को सिद्धपीठों पर उमड़ा जनसैलाब
Chaitra Navratri 2026: The holy city of Haridwar resounded with chants of 'Jai Mata Di', and a huge crowd gathered at the Siddha Peethas to have darshan of Goddess Shailputri.
शक्ति उपासना के पावन पर्व चैत्र नवरात्रि का आज से भव्य आगाज हो गया है। धर्मनगरी हरिद्वार में सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। Chaitra Navratri 2026 Haridwar Temple Celebrations के तहत शिवालिक की पहाड़ियों से लेकर गंगा किनारे बसे प्राचीन मंदिरों तक, हर तरफ आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। चैत्र प्रतिपदा के इस अवसर पर भक्तों ने मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप, ‘मां शैलपुत्री’ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
सिद्धपीठों पर तड़के 4 बजे से भक्तों का तांता
हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी माने जाने वाले माया देवी मंदिर में सुबह 4 बजे से ही भक्तों का आवागमन शुरू हो गया था। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, यही वजह है कि नवरात्रि के पहले दिन मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से खचाखच भरा रहा। मंदिर को विशेष रूप से रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाया गया है, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
मनसा देवी और चंडी देवी में आस्था की डगर
शिवालिक पर्वतराज की चोटी पर स्थित सुप्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। पैदल मार्ग हो या रोपवे (उड़नखटोला), हर जगह भक्तों की भारी भीड़ रही। Chaitra Navratri 2026 Haridwar Temple Celebrations की रौनक बयां करते हुए मंदिर के पुजारी पंकज तिवारी ने बताया कि नवरात्रि के नौ दिनों तक यहाँ विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन और माता को छप्पन भोग अर्पित करना इस उत्सव का मुख्य हिस्सा है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब महिषासुर के आतंक से त्रिलोक थर्रा उठा था, तब देवताओं की पुकार पर मां दुर्गा ने अपने मन की शक्ति से एक दिव्य स्वरूप प्रकट किया, जिन्हें ‘मनसा देवी’ कहा गया। महिषासुर वध के बाद से ही मां का यह स्वरूप भक्तों की रक्षा और मनोकामना पूर्ति का केंद्र बना हुआ है।
भक्ति और श्रद्धा के रंग में डूबी धर्मनगरी
हरिद्वार के चंडी देवी, दक्षिण काली और सुरेश्वरी देवी मंदिरों में भी Chaitra Navratri 2026 Haridwar Temple Celebrations की धूम रही। गंगा घाटों पर स्नान करने के बाद श्रद्धालु सीधे माता के दरबार में माथा टेकने पहुँच रहे हैं। पूरे शहर में ‘जय माता दी’ की गूंज सुनाई दे रही है, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। प्रशासन ने भी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को सुगम दर्शन प्राप्त हो सकें।
मां शैलपुत्री की उपासना का महत्व
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि आज के दिन की गई आराधना से जीवन में स्थिरता और संकल्प शक्ति प्राप्त होती है। हरिद्वार के मायापुर क्षेत्र से लेकर कनखल तक के मंदिरों में आज सुबह से ही भजन-कीर्तन का दौर जारी है।

