जय बाबा केदार! पंचमुखी डोली गुप्तकाशी पहुंची, आज ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में होगी विराजमान
Hail Baba Kedar! The five-headed palanquin has arrived in Guptkashi and will be installed at the Omkareshwar Temple in Ukhimath today.
गुप्तकाशी: स्थानीय वाद्य यंत्रों की गूंज, आर्मी बैंड की मधुर धुन और हजारों भक्तों की जयकारों के बीच बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली शुक्रवार को अपने दूसरे रात्रि प्रवास के लिए गुप्तकाशी पहुंची। भक्तों ने फूलों की वर्षा और भव्य आरती के साथ डोली का स्वागत किया। शनिवार सुबह डोली ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी, जहां आगामी छह माह तक बाबा केदार की शीतकालीन पूजा-अर्चना की जाएगी।
भैया दूज के अवसर पर विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट विधिवत बंद कर दिए गए। इसके बाद पंचमुखी डोली शीतकालीन गद्दीस्थल की यात्रा पर रवाना हुई। पहले दिन डोली रामपुर पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना हुई। इसके बाद आर्मी बैंड की मधुर धुन और भक्तों के जयघोष के साथ डोली ने गुप्तकाशी की ओर प्रस्थान किया।
गुप्तकाशी में भव्य स्वागत
गुप्तकाशी में डोली के आगमन पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। पूरे क्षेत्र में “जय केदार” के नारे गूंजे। विश्वनाथ मंदिर में दीप, पुष्प और घंटानाद के साथ बाबा का स्वागत किया गया। फाटा, ब्यूंग, नारायणकोटी और अन्य पड़ावों पर भी भक्तों ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
ऊखीमठ में विराजमान होगी डोली
शनिवार की सुबह डोली ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी। यहां बाबा की भोग मूर्ति विराजमान होगी और अगले छह महीनों तक पूजा-अर्चना संपन्न होगी। ओंकारेश्वर मंदिर को पंचकेदारों का शीतकालीन गद्दीस्थल भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां एक साथ पांचों केदारों – केदारनाथ, मध्यमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर – के दर्शन किए जा सकते हैं।
धार्मिक और पर्यटन केंद्र
ओंकारेश्वर मंदिर के आसपास कई आकर्षक स्थल भी हैं, जैसे चोपता और चंद्रशिला, जो प्राकृतिक सौंदर्य के साथ श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं। हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलता है।
उत्तराखंड सरकार और बद्री-केदार मंदिर समिति पिछले कुछ वर्षों से शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा दे रही हैं, ताकि तीर्थयात्री केवल गर्मियों में नहीं, बल्कि सर्दियों में भी धार्मिक स्थलों का दर्शन कर सकें।
श्रद्धा, संस्कृति और आस्था का प्रतीक
गुप्तकाशी से ऊखीमठ तक की यह यात्रा धार्मिक परंपरा के साथ आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक बन चुकी है। आने वाले छह माह तक ऊखीमठ में बाबा केदार की पूजा होगी और श्रद्धालु “जय बाबा केदार” के जयकारों से घाटी को पवित्र बनाएंगे।

