पति-पत्नी के बीच संबंधों और वैवाहिक अधिकारों पर हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि पति का अपनी पत्नी से यौन संबंध बनाने की मांग करना स्वाभाविक है
लखनऊ: इस निर्णय के बाद यह बहस भी उठी है कि वैवाहिक संबंधों में आपसी सहमति का क्या महत्व है और क्या किसी व्यक्ति की इच्छाओं के विरुद्ध संबंध बनाना उचित है। भारतीय कानून के अनुसार, किसी भी संबंध में सहमति महत्वपूर्ण होती है, चाहे वह वैवाहिक संबंध ही क्यों न हो।
इसलिए यह निर्णय कानूनी और नैतिक मुद्दों को लेकर लोगों के बीच बहस का विषय बन सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में दिए गए इस निर्णय में पति-पत्नी के बीच संबंधों और वैवाहिक अधिकारों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की गई है। यह मामला 23 जुलाई 2018 का है, जब नोएडा की एक महिला ने अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई। महिला ने अपने पति पर दहेज की मांग, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया।
“अगर पति अपनी पत्नी से संबंध नहीं बनाएगा तो किससे कहेगा-हाईकोर्ट”
शिकायत में महिला ने कहा कि उसका पति शराब के नशे में उसके साथ दुर्व्यवहार करता था, अश्लील फिल्में देखता था, और उसी प्रकार के यौन संबंध बनाने के लिए उस पर दबाव डालता था। जब उसने इसका विरोध किया, तो पति ने उसकी जान लेने की कोशिश की। कोर्ट ने कहा कि एक पति का अपनी पत्नी से यौन संबंध बनाने की मांग करना स्वाभाविक है, और इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता।
इस निर्णय के बाद यह बहस भी उठी है कि हालांकि, महिला के अनुसार, उनकी शादी 7 दिसंबर 2015 को हुई थी, और शादी के आठ महीने बाद वह सिंगापुर अपने पति के पास गई, जहां भी उसके पति का व्यवहार हिंसक था। उसने दावा किया कि सिंगापुर में भी उसे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। इस घटना ने वैवाहिक जीवन में सहमति और सम्मान के महत्व को लेकर एक गंभीर चर्चा को जन्म दिया है, और इस प्रकार के मामलों में कानून के हस्तक्षेप की आवश्यकता पर भी सवाल खड़े किए हैं। इस मामले में पति पर पत्नी ने दहेज मांग, प्रताड़ना और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया था, जिस पर कोर्ट ने इन दावों को खारिज कर दिया।




