उत्तराखंड

अंकिता भंडारी हत्याकांड पर सियासत तेज, कांग्रेस अध्यक्ष का दावा—पर्दे के पीछे सीबीआई जांच के पक्ष में थे कई भाजपाई

Politics intensifies over the Ankita Bhandari murder case; Congress president claims several BJP leaders were secretly in favor of a CBI investigation.

बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है। भले ही राज्य सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी हो, लेकिन इसके बावजूद सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर हलचल पैदा कर दी है।

कांग्रेस का बड़ा दावा, भाजपा पर निशाना

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दावा किया है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जहां एक ओर कांग्रेस, सामाजिक संगठन और आम जनता खुलकर सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे, वहीं भाजपा के कई नेता भी पर्दे के पीछे इस मांग के समर्थन में खड़े थे। गोदियाल का कहना है कि आंदोलन के दौरान कई भाजपाई नेताओं ने उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया और सरकार पर दबाव बनाने की बात कही। उनका आरोप है कि ये नेता सार्वजनिक मंच पर बोलने से बचते रहे, लेकिन निजी बातचीत में वे भी चाहते थे कि इस संवेदनशील मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। गोदियाल ने कहा कि यदि भाजपा के भीतर भी इतनी बड़ी संख्या में लोग निष्पक्ष जांच के पक्ष में थे, तो सरकार ने समय रहते फैसला क्यों नहीं लिया।

जनदबाव बढ़ने तक सरकार रही चुप?

गणेश गोदियाल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को कई बार सीबीआई जांच की सलाह दी गई, लेकिन सरकार ने तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जब तक जनदबाव अपने चरम पर नहीं पहुंच गया। उनके मुताबिक, अगर शुरुआत में ही निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का फैसला ले लिया जाता, तो सड़कों पर आक्रोश और विरोध प्रदर्शन की नौबत नहीं आती। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भाजपा के कुछ नेताओं ने इस मामले में सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जताई और यहां तक कि इस्तीफा तक दिया, जबकि अधिकांश नेता चुप्पी साधे रहे। कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि यह चुप्पी खुद कई सवाल खड़े करती है।

सीबीआई जांच के बावजूद जारी सियासी घमासान

अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद अब गेंद केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसी के पाले में है। औपचारिक मंजूरी के बाद ही जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। लेकिन इस बीच कांग्रेस सरकार की मंशा पर सवाल उठाने से पीछे नहीं हट रही है। कांग्रेस का कहना है कि केवल सीबीआई जांच की घोषणा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो, ताकि किसी भी तरह के दबाव या प्रभाव से बचा जा सके। यही मांग कई सामाजिक संगठन और आंदोलनकारी समूह भी लगातार दोहरा रहे हैं।

भाजपा ने आरोपों को किया खारिज

कांग्रेस अध्यक्ष के इन आरोपों पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने गणेश गोदियाल के दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि ऐसे बयान केवल राजनीतिक लाभ के लिए दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के साथ सामने आना चाहिए। महेंद्र भट्ट का कहना है कि भाजपा अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा करती है और पार्टी पूरी मजबूती के साथ सरकार के फैसले के साथ खड़ी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के आरोपों से भाजपा के भीतर किसी तरह का भ्रम या संदेह पैदा नहीं होने वाला।

केंद्रीय एजेंसी की भूमिका पर टिकी निगाहें

फिलहाल सीबीआई जांच की संस्तुति हो चुकी है, लेकिन अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय एजेंसी कब औपचारिक रूप से जांच शुरू करती है और जांच का दायरा क्या होगा। यह भी देखा जाना बाकी है कि जांच किन बिंदुओं पर केंद्रित होगी और क्या सभी आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल हो पाएगी। इस बीच कांग्रेस और सामाजिक संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे इस मामले पर नजर बनाए रखेंगे और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज करेंगे। उनका कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष किया जाएगा।

भाजपा खेमे में बढ़ी हलचल

गणेश गोदियाल के बयान के बाद भाजपा के भीतर भी चर्चा का माहौल जरूर बना है। भले ही पार्टी नेतृत्व इन आरोपों को सिरे से नकार रहा हो, लेकिन यह सवाल राजनीतिक गलियारों में उठने लगा है कि आखिर कौन से नेता खुलकर सरकार के समर्थन में आए और कौन चुप रहकर पर्दे के पीछे अपनी भूमिका निभाते रहे।

 

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