1 अगस्त से ICICI बैंक वसूलेगा UPI ट्रांजैक्शन शुल्क, पेमेंट एग्रीगेटर्स और व्यापारियों पर बढ़ेगा असर
ICICI Bank will charge UPI transaction fee from August 1, the impact on payment aggregators and merchants will increase
नई दिल्ली: देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ-साथ बैंकों की लागत वसूली की रणनीति भी सामने आने लगी है। 1 अगस्त 2025 से ICICI बैंक ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर पेमेंट एग्रीगेटर्स (PA) से हैंडलिंग चार्ज वसूलने का फैसला लिया है। इससे पहले यस बैंक और एक्सिस बैंक भी इस राह पर चल चुके हैं। अब ICICI बैंक के इस कदम से डिजिटल भुगतान उद्योग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
शुल्क की दरें क्या होंगी?
ICICI बैंक के अनुसार, यदि किसी पेमेंट एग्रीगेटर का एस्क्रो अकाउंट ICICI में ही है, तो प्रत्येक यूपीआई लेनदेन पर 0.02% (2 बेसिस पॉइंट) शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 6 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन होगी। वहीं, यदि एस्क्रो खाता ICICI के बाहर है, तो यह शुल्क 0.04% (4 बेसिस पॉइंट) होगा और अधिकतम सीमा 10 रुपये तय की गई है। हालांकि, यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, बल्कि पेमेंट एग्रीगेटर के माध्यम से वसूला जाएगा।
किन ट्रांजैक्शनों पर नहीं लगेगा शुल्क?
यदि कोई ग्राहक भुगतान सीधे व्यापारी के ICICI बैंक खाते में करता है, तो उस पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा। यानी सीधे बैंक खाते में पेमेंट स्वीकार करने वाले व्यापारियों को शुल्क नहीं देना होगा। इससे छोटे व्यापारियों को लाभ हो सकता है, जो थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म की बजाय सीधे बैंकिंग चैनलों से लेन-देन करते हैं।
शुल्क क्यों वसूले जा रहे हैं?
UPI ट्रांजैक्शन पर सरकार ने ग्राहकों के लिए कोई शुल्क निर्धारित नहीं किया है, लेकिन इसके संचालन की लागत बैंक खुद वहन करते हैं। NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) द्वारा UPI स्विचिंग चार्ज लिया जाता है, जबकि व्यापारियों से कोई MDR (Merchant Discount Rate) नहीं मिलती। इस लागत अंतर को भरने के लिए अब बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स से शुल्क वसूल रहे हैं।
व्यापारियों और ग्राहकों पर प्रभाव
हालांकि यह शुल्क सीधे तौर पर ग्राहकों पर नहीं लगाया जा रहा है, लेकिन पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए यह एक अतिरिक्त खर्च बन जाएगा। इससे व्यापारियों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि अधिकतर प्लेटफॉर्म पहले से ही सर्विस चार्ज और अन्य फीस वसूलते हैं। भविष्य में इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है।
नीति निर्माताओं के लिए चुनौती
UPI भारत सरकार की डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक मुख्य स्तंभ है और इसे निशुल्क बनाए रखने का उद्देश्य अधिक लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है। लेकिन अगर बैंकों द्वारा शुल्क की यह प्रक्रिया बढ़ती रही, तो यह सरकार की नीति और डिजिटल भुगतान की सहजता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकती है। RBI और नीति आयोग के लिए यह एक नई चुनौती बन सकती है।


