नई दिल्ली: वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है। पिछले साल 147 देशों की सूची में 126वें स्थान पर रहने वाला भारत इस साल 118वें स्थान पर पहुंच गया है। हालांकि, भारत अभी भी दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची में काफी पीछे है।
खुशी का मापदंड और रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
यह रिपोर्ट हर साल 20 मार्च को ‘वर्ल्ड हैप्पीनेस डे’ के अवसर पर जारी की जाती है। इसे तैयार करने के लिए मुख्य रूप से तीन मानकों को ध्यान में रखा जाता है:
- जीवन का मूल्यांकन – लोग अपने जीवन को कितनी संतोषजनक मानते हैं।
- सकारात्मक भावनाएं – लोगों की खुशी, प्रेम और संतोष की भावना।
- नकारात्मक भावनाएं – तनाव, चिंता और दुख का स्तर।
फिनलैंड फिर बना दुनिया का सबसे खुशहाल देश
रिपोर्ट के अनुसार, फिनलैंड लगातार आठवें साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना हुआ है। वहीं, अफगानिस्तान इस सूची में सबसे निचले पायदान पर है।
अमेरिका की रैंकिंग में गिरावट
अमेरिका की स्थिति में लगातार गिरावट देखी गई है। 2023 की रिपोर्ट में अमेरिका 15वें स्थान पर था, पिछले साल 23वें और इस बार 24वें स्थान पर खिसक गया है।
भारत क्यों नहीं शामिल है टॉप देशों में?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के टॉप देशों में शामिल न होने की कई वजहें हैं:
- आर्थिक असमानता और गरीबी
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
- बढ़ता प्रदूषण और पर्यावरणीय समस्याएं
- सामाजिक असमानता और मानसिक तनाव
भूटान की पहल से शुरू हुई थी यह रिपोर्ट
वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट की शुरुआत भूटान की पहल पर हुई थी। भूटान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में विकास को खुशहाली से जोड़ने का प्रस्ताव रखा था, जिसे 19 जुलाई 2011 को स्वीकार किया गया। इसके बाद पहली वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2012 में प्रकाशित हुई। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल 20 मार्च को ‘अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया।
क्या भारत आने वाले वर्षों में और खुशहाल बन सकता है?
भारत में आर्थिक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दिया जाए तो आने वाले वर्षों में हैप्पीनेस इंडेक्स में और सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को भी प्राथमिकता देने की जरूरत है।


