बजट 2026-27 से उत्तराखंड को बड़ी उम्मीदें, चुनावी साल में केंद्र की खास नजर
Uttarakhand has high expectations from the 2026-27 budget, and the central government is paying special attention to the state in this election year.
देहरादून: एक फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। इस बजट को लेकर देशभर के राज्यों की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं, लेकिन उत्तराखंड के लिए यह बजट विशेष अहमियत रखता है। कारण साफ है—साल 2027 में राज्य में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और उससे पहले आने वाला यह बजट विकास योजनाओं के साथ-साथ राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
चुनावी वर्ष से पहले केंद्र से सहयोग की आस
उत्तराखंड सरकार ने बजट से पहले केंद्र सरकार को अपनी प्राथमिकताओं से जुड़ा विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है। इसमें नई योजनाओं के साथ-साथ पहले से चल रही केंद्रीय योजनाओं में अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग शामिल है। राज्य सरकार का प्रयास है कि चुनावी साल से पहले प्रदेश को अधिकतम केंद्रीय सहयोग मिल सके।
पर्यटन और धार्मिक आयोजनों पर फोकस
पर्यटन और धार्मिक गतिविधियां उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, यातायात और आपदा प्रबंधन पर भारी खर्च होता है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने धार्मिक पर्यटन से जुड़ी योजनाओं के लिए केंद्र से विशेष सहायता की उम्मीद जताई है।
जल संकट और जल संरक्षण प्रमुख मुद्दा
पर्वतीय राज्य होने के बावजूद उत्तराखंड के कई इलाकों में पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने से हालात और बिगड़े हैं। ऐसे में जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए अलग बजटीय प्रावधान की मांग की गई है।
विशेष पूंजीगत सहायता पर नजर
राज्य सरकार केंद्र से मिलने वाली विशेष पूंजीगत सहायता को जारी रखने और बढ़ाने की उम्मीद कर रही है। यह सहायता बिना ब्याज के लंबी अवधि के ऋण के रूप में मिलती है, जिसका उपयोग बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं में किया जाता है। बीते वर्षों में इस सहायता से कई अहम परियोजनाओं को गति मिली है।
रेल नेटवर्क विस्तार की मांग
पहाड़ी भूगोल के कारण उत्तराखंड में रेल कनेक्टिविटी सीमित है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसी परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, लेकिन सरकार अन्य दुर्गम क्षेत्रों को भी रेलवे से जोड़ने की मांग कर रही है, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को बढ़ावा मिल सके।
सामाजिक सुरक्षा और ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतें
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय और वृद्धावस्था पेंशन योजनाओं में केंद्र की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग भी बजट प्रस्तावों में शामिल है। साथ ही, छोटी जल विद्युत परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की जरूरत जताई गई है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष और आईटी सेक्टर
ग्रामीण इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए सुरक्षा उपायों के लिए विशेष बजट की मांग की गई है। वहीं आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भी केंद्र से सहयोग की उम्मीद है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट 2026-27 में उत्तराखंड की इन मांगों को कितनी प्राथमिकता मिलती है, क्योंकि यह बजट राज्य के विकास और सियासी माहौल दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।



