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“छठ पूजा, में महिलाएं व पुरुष का पूजा दौरान कुछ खास रंगों के वस्त्रों का महत्व “

पर्व सूर्य भगवान और प्रकृति पूजा के लिए समर्पित

Chhath Puja 2024: छठ पूजा में पहनने के लिए शुभ माने जाते जाते हैं इन रंगों के कपड़े, महिलाएं रखें खास ध्यानछठ पूजा के नियमों में वस्त्रों को लेकर भी नियम भी शामिल है. व्रत रखने वाली महिलाओं के साथ साथ परिवार की अन्य महिलाएं व पुरुष भी इस दौरान कुछ खास रंगों के वस्त्र को ज्यादा महत्व देते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में छठ पूजा  का पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. प्रकृति और सूयदेव की अराधना का यह महापर्व नहाय-खाय से शुरू होता होता है और उगते सूर्य को अर्घ्य से समाप्त होता है. व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर सुख समृद्धि और संतान की लंबी उम्र का वरदान मांगते हैं. छठ पूजा के नियमों में वस्त्रों को लेकर भी नियम भी शामिल है. व्रत रखने वाली महिलाओं के साथ साथ परिवार की अन्य महिलाएं व पुरुष भी इस दौरान कुछ खास रंगों के वस्त्र को ज्यादा महत्व देते हैं।

इस अवसर पर सभी पारंपरिक परिधान  पहनना पसंद करते हैं. आइए जानते हैं कुछ ऐसे रंग जिन्हें छठ पूजा के दौरान पहनकर व्रत का माहौल में उपासना के रंग झिलमिला उठेंगे। छठ महापर्व में पहने ये खास रंग लाल रंग हिंदू धर्म में पूजा के दौरान लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. यह सुहागिनों का रंग है और महिलाओं के लिए काफी खास होता है. छठ पर्व में आप लाल रंग के परिधान पहन सकते हैं. लाल के साथ साथ इससे मिलते जुलते रंग जैसे मरून भी पहना जा सकता है. इन रंगों की साड़ी, सूट या लहंगा महिलाओं के लिए सही होगा और पुरुष लाल या मरून कुर्ता पहन सकते हैं। हरे रंग को सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. छठ पूजा के दिन हरे रंग का आउटफिट पहने जा सकते हैं. महिलाएं सावन में भी हरे रंग के कपड़े पहनती हैं. हरे रंग की साड़ी या फिर हरे रंग का सूट कैरी कर पर्व का माहौल बना सकती हैं। पुरुष भी हरे रंग का कुर्ता पहन प्रकृति का आभार मान सकते हैं। पीले रंग को पूजा का खास रंग माना जाता है। छठ पूजा के दिन पीले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ होगा। पीले रंग की साड़ी, सूट और लहंगा महिलाओं के पास जरूर होते हैं। पूजा के समय पीला रंग पहनकर पर्व के दौरान आप खिल सकते हैं। लाल, पीला और हरा के अलावा नारंगी रंग को भी पूजा पाठ के लिए शुभ माना जाता है। नारंगी या भगवा रंग को हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ रंग माना जाता है।

 छठ पूजा में क्यों करते हैं मिट्टी के बरतनों का उपयोग,

जानिए इस महाव्रत में किन नियमों का पालन है जरूरी दिवाली के बाद छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस महाव्रत में कई नियमों का पालन जरूरी होता है. आइए जानते हैं छठ पूजा में किन नियमों का पालन होता है जरूरी। दिवाली के बाद छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं. दिवाली के चार दिन बाद से छठ महापर्व की शुरुआत हो जाती है. यह पर्व सूर्य भगवान और प्रकृति पूजा के लिए समर्पित होता है और व्रती चार दिन तक उपवास रखते हैं. महाव्रत की शुरुआत नहाय खाय से होती है, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य के बाद व्रती उपवास तोड़ते हैं. इस महाव्रत में कई नियमों का पालन जरूरी होता है. आइए जानते हैं छठ महाव्रत के नियम, इसका महत्व और तिथियां छठ पूजा के नियम महापर्व छठ में कई नियमों का पालन जरूरी होता है।

इस पर्व में मिट्‌टी और पवित्र धातु पीतल के बरतनों का उपयोग करना जरूरी है. छठ पूजा करने वाले पूरे परिवार के साथ दिवाली के बाद से सात्विक भोजन करते हैं. पूजा के लिए बनाए जाने वाले प्रसाद के लिए गेहुं की साफ सफाई पर भी बहुत ध्यान दिया जाता है. पूजा वाले घर में साफ सफाई और पवित्रता का खास ध्यान रखा जाता है. व्रत के दौरान व्रती साफ वस्त्र धारण करते हैं और जमीन पर चटाई बिछाकर सोते हैं. पूजा के लिए बांस से बनी टोकरी और सूप का उपयोग किया जाता है।

छठ का महापर्व जीवन में सुख समृद्धि और संतान की लंबी उम्र की कामना के साथ किया जाता है. यह जीवन के केंद्र सूर्य देव और प्रकृति के प्रति मानव जाति की कृतज्ञता को प्रदर्शित किए जाने का पर्व है. यह सनातन धर्म में शुरू से प्रकृति के महत्व को समझने और उसे महत्व देने का प्रतीक पर्व है. बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में किया जाने वाला यह महापर्व और पूरे देश ही नहीं विदेश में भी किया जाने लगा है।

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