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Budget 2026 से पहले समझें टैक्स का सही गणित, नया या पुराना- किसमें बचेगा ज्यादा पैसा?

Understand the true tax calculations before Budget 2026, New or old regime - which one will save you more money?

नई दिल्ली; केंद्रीय बजट 2026-27 आज संसद में पेश किया जा रहा है और इसके साथ ही देश के करोड़ों करदाताओं की नजरें इनकम टैक्स से जुड़े एलानों पर टिकी हुई हैं। हर नौकरीपेशा और व्यवसायी यही जानना चाहता है कि इस बार टैक्स में राहत मिलेगी या नहीं। हालांकि, यदि टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है, तो करदाताओं को मौजूदा टैक्स ढांचे के तहत ही अपनी योजना बनानी होगी।

फिलहाल नया टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प है, लेकिन करदाताओं के पास अब भी पुराना टैक्स सिस्टम चुनने की सुविधा मौजूद है। ऐसे में बजट से पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी आय और निवेश के हिसाब से कौन-सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

पुराना टैक्स रिजीम: निवेश करने वालों के लिए फायदेमंद

पुराना टैक्स सिस्टम उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है जो टैक्स बचाने के लिए नियमित निवेश करते हैं। इसमें 2.50 लाख रुपये तक की सालाना आय टैक्स-फ्री रहती है। इसके बाद अलग-अलग आय वर्ग पर 5 से 30 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाता है।

इस रिजीम की सबसे बड़ी ताकत 80C, 80D, होम लोन ब्याज, HRA और अन्य कटौतियां हैं। पीपीएफ, ईएलएसएस, लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और होम लोन जैसी योजनाओं में निवेश करने वालों का टैक्स बोझ इस सिस्टम में काफी हद तक कम हो सकता है।

पुराने टैक्स रिजीम की स्लैब दरें

  • ₹2.50 लाख तक – शून्य
  • ₹2.50 से ₹7 लाख – 5%
  • ₹7 से ₹10 लाख – 10%
  • ₹10 से ₹12 लाख – 15%
  • ₹12 से ₹15 लाख – 20%
  • ₹15 लाख से ऊपर – 30%

नया टैक्स रिजीम: आसान और कम झंझट

सरकार पिछले कुछ वर्षों से नए टैक्स रिजीम को बढ़ावा दे रही है। इसमें निवेश के दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होती और टैक्स फाइलिंग काफी सरल रहती है। इस सिस्टम में 3 लाख रुपये तक की आय टैक्स-फ्री है।

इसके बाद अलग-अलग स्लैब में टैक्स लगाया जाता है, जबकि 15 लाख रुपये से अधिक आय पर दोनों सिस्टम में समान रूप से 30 प्रतिशत टैक्स देना होता है।

नए टैक्स रिजीम की स्लैब दरें

  • ₹3 लाख तक – शून्य
  • ₹3 से ₹7 लाख – 5%
  • ₹7 से ₹10 लाख – 10%
  • ₹10 से ₹12 लाख – 15%
  • ₹12 से ₹15 लाख – 20%
  • ₹15 लाख से ऊपर – 30%

कौन-सा विकल्प आपके लिए सही?

अगर आप ज्यादा निवेश नहीं करते, टैक्स प्रक्रिया को सरल रखना चाहते हैं और कटौतियों का लाभ सीमित है, तो नया टैक्स रिजीम आपके लिए बेहतर हो सकता है। वहीं, अगर आप टैक्स सेविंग स्कीम्स में नियमित निवेश करते हैं और अधिक छूट चाहते हैं, तो पुराना टैक्स रिजीम अब भी फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

नए टैक्स रिजीम में लगातार सुधार इस ओर इशारा करते हैं कि भविष्य में सरकार इसे ही मुख्य सिस्टम बना सकती है। फिलहाल दोनों विकल्प खुले हैं, इसलिए बजट से पहले अपनी आय, निवेश और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर सही फैसला लेना ही समझदारी होगी।

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