Uttarakhand Green Cess Issues: ‘ग्रीन सेस’ की राह में शरारती तत्व बने रोड़ा, कहीं काटी जा रही केबल, तो कहीं सर्वर पड़ रहा छोटा, राजस्व को लाखों की चपत
Uttarakhand Green Cess Issues: Mischievous elements are hindering the implementation of the 'Green Cess', with cables being cut and servers falling short, resulting in revenue losses worth lakhs.
उत्तराखंड सरकार के राजस्व को बढ़ाने के लिए शुरू की गई ‘ग्रीन सेस’ (Green Cess) योजना अब चुनौतियों के भंवर में फंसती नजर आ रही है। राज्य के प्रवेश द्वारों पर बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर नजर रखने के लिए लगाए गए आधुनिक एएनपीआर (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों को कुछ शरारती तत्व निशाना बना रहे हैं। कहीं कैमरों की केबल काटी जा रही है, तो कहीं तकनीकी खामियां विभाग के लिए सिरदर्द साबित हो रही हैं। आलम यह है कि आगामी चारधाम यात्रा से पहले विभाग इन अड़चनों को दूर करने की जद्दोजहद में जुटा है, ताकि लाखों के राजस्व घाटे को रोका जा सके।
शरारती तत्वों की ‘सर्जिकल स्ट्राइक
परिवहन विभाग की ओर से 15 मार्च से राज्य के बॉर्डर्स पर ग्रीन सेस की वसूली शुरू की गई थी। इसके तहत बाहरी राज्यों के वाहनों की नंबर प्लेट को एएनपीआर कैमरे कैप्चर करते हैं और फास्टैग (FASTag) के जरिए टैक्स काट लिया जाता है। लेकिन हरिद्वार जिले के नारसन बॉर्डर, काशीपुर और धर्मपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में शरारती तत्व सक्रिय हैं।
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के अनुसार, धर्मपुर में दो बार और नारसन बॉर्डर पर कई बार कैमरों की केबल काटने के मामले सामने आए हैं। विभाग को अंदेशा है कि उत्तराखंड में रहने वाले उन लोगों द्वारा यह करतूत की जा रही है जिनके पास बाहरी राज्यों के नंबर वाले वाहन हैं। केबल कटने से कैमरा बंद हो जाता है और हजारों वाहन बिना टैक्स दिए राज्य में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
सर्वर में ‘स्पेस’ की कमी: सबूतों पर फिर रहा पानी
इस समस्या से निपटने के लिए विभाग ने निगरानी (Surveillance) और बुलेट कैमरे भी लगाए, ताकि केबल काटने वालों की पहचान की जा सके। लेकिन यहाँ एक नई तकनीकी अड़चन सामने आई है। आईटीडीए (Information Technology Development Agency) के सर्वर में स्पेस की भारी कमी है।
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एक दिन का बैकअप: वर्तमान में कैमरों की रिकॉर्डिंग का बैकअप केवल 24 घंटे का ही मिल पा रहा है।
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पहचान में मुश्किल: यदि केबल रात में कटती है और विभाग को अगले दिन दोपहर में पता चलता है, तब तक पुराना डेटा सर्वर से डिलीट हो चुका होता है। ऐसे में दोषियों को वेरीफाई करना नामुमकिन हो गया है।
अब विभाग योजना बना रहा है कि डेटा स्टोरेज क्षमता को बढ़ाकर कम से कम एक महीने किया जाए, ताकि हर गतिविधि पर लंबी अवधि तक नजर रखी जा सके।
बिजली कटौती और यूपीएस बैकअप की चुनौती
केबल कटने के अलावा ‘पावर कट’ भी ग्रीन सेस वसूली में बड़ी बाधा है। बॉर्डर क्षेत्रों में बिजली की भारी कटौती होती है और वर्तमान में उपलब्ध यूपीएस (UPS) सिस्टम का बैकअप बहुत कम है।
विशेष रूप से नारसन बॉर्डर, जहाँ से उत्तराखंड का 40 से 50 प्रतिशत ट्रैफिक गुजरता है, वहां बिजली जाते ही टैक्स वसूली ठप हो जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए विभाग अब नारसन जैसे प्रमुख बॉर्डर्स पर जेनरेटर लगाने पर विचार कर रहा है। हालांकि, इन मशीनों और कैमरों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त मैनपावर (सुरक्षाकर्मी) की भी आवश्यकता होगी, जिस पर फिलहाल मंथन जारी है।
15 दिनों में ₹6 करोड़ का कलेक्शन
बाधाओं के बावजूद, ग्रीन सेस विभाग के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया बनकर उभरा है।
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दैनिक आय: विभाग को वर्तमान में प्रतिदिन करीब 20 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है।
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कुल वसूली: 15 मार्च से अब तक लगभग 6 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा हो चुके हैं।
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चारधाम यात्रा से उम्मीद: विभाग का अनुमान है कि अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के दौरान, जब रोजाना हजारों वाहन बाहर से आएंगे, तब यह आय कई गुना बढ़ सकती है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब कैमरों और सर्वर की सुरक्षा पुख्ता हो।
कौन हैं ये शरारती तत्व?
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह का मानना है कि यह किसी संगठित गिरोह का काम नहीं, बल्कि उन वाहन स्वामियों की करतूत हो सकती है जो रोजाना बॉर्डर पार करते हैं और ग्रीन सेस देने से बचना चाहते हैं। इसके अलावा कुछ असामाजिक तत्व केवल व्यवस्था को बाधित करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। अब तक कुल चार गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं, जिनकी जांच पुलिस की मदद से की जा रही है।
ग्रीन सेस वसूली की मुख्य बाधाएं (Table):
| समस्या | प्रभाव | प्रस्तावित समाधान |
| केबल कटिंग | कैमरा बंद, राजस्व हानि | मैनपावर एवं गार्ड की तैनाती |
| सर्वर स्पेस | रिकॉर्डिंग गायब होना | 30 दिन का बैकअप स्टोरेज |
| बिजली कटौती | सिस्टम शटडाउन | जेनरेटर और हाई-कैपेसिटी यूपीएस |
| स्थानीय विरोध | टैक्स चोरी की कोशिश | कानूनी कार्रवाई एवं एफआईआर |



