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चारधाम यात्रा में गिरावट, कैंची धाम में तीर्थयात्रियों की बाढ़: तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने जताई चिंता

Decline in Chardham Yatra, flood of pilgrims in Kainchi Dham: Tirtha Purohit Mahapanchayat expressed concern

देहरादून, 21 जून 2025: उत्तराखंड की धार्मिक पहचान उसके प्राचीन तीर्थ स्थलों के कारण ही “देवभूमि” के रूप में स्थापित हुई है। यहां स्थित चारधाम — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ — हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। हालांकि इस वर्ष तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने इन तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की घटती संख्या को लेकर चिंता जताई है। इसके विपरीत, नैनीताल जिले में स्थित बाबा नीम करोली महाराज का कैंची धाम तीव्र गति से लोकप्रिय हो रहा है और वहां दर्शन करने वालों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है।

चारधाम में यात्रियों की कमी, कैंची धाम में उछाल

चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती के अनुसार, वर्ष 2024 में चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या 46.20 लाख रही, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 54.42 लाख था। यानी यात्रियों की संख्या में करीब 8.21 लाख की कमी आई है, जो लगभग 16% की गिरावट को दर्शाता है। इसके विपरीत, कैंची धाम में पिछले वर्ष जहां लगभग 8 लाख लोग पहुंचे थे, वहीं इस बार यह संख्या बढ़कर 24 लाख हो गई — जो 300% की वृद्धि मानी जा रही है।

असुविधाएं बनीं कारण

डॉ. सती का मानना है कि चारधाम यात्रा के दौरान यात्री अव्यवस्थाओं, जटिल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और सीमित सुविधा के कारण हतोत्साहित हो रहे हैं। दूसरी ओर, कैंची धाम की सुगम पहुंच, बेहतर प्रबंधन और प्रचार-प्रसार ने श्रद्धालुओं को वहां आकर्षित किया है।

प्रतिक्रियाएं और तर्क

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इन आंकड़ों की तुलना को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा एक कठिन भूगोल में सीमित समय के लिए होती है, जबकि कैंची धाम सालभर खुला रहता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तीर्थयात्रियों का पंजीकरण उनकी सुरक्षा और ट्रैकिंग के लिए आवश्यक है।

चारधाम और कैंची धाम, दोनों ही तीर्थस्थल आस्था के केंद्र हैं। हालांकि तीर्थ पुरोहितों द्वारा उठाए गए सवाल यह इशारा करते हैं कि चारधाम यात्रा को लेकर व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है। सरकार को चाहिए कि वह तीर्थयात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और अनुभव को बेहतर बनाए ताकि यह पवित्र यात्रा श्रद्धालुओं के लिए और अधिक प्रेरक बन सके।

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