उत्तराखंड

66 साल से दरक रहा सिरोहबगड़ का पहाड़, फिर थमा बद्रीनाथ हाईवे… 5 किलोमीटर लंबा जाम, चारधाम यात्रा पर बड़ा असर

उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर चारधाम यात्रा की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। Rishikesh Badrinath NH 58 Blocked होने के बाद हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रुद्रप्रयाग जिले के सिरोहबगड़ लैंडस्लाइड जोन में पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गिर गया, जिससे सड़क पूरी तरह बंद हो गई। देखते ही देखते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया। यह वही सिरोहबगड़ क्षेत्र है, जिसे पिछले छह दशकों से उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में गिना जाता है। वर्ष 1960 से लगातार दरक रहे इस पहाड़ का स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है। हर मानसून में यहां भूस्खलन होता है और यात्रा मार्ग कई बार बाधित होता है। भारी बारिश के बाद फिर टूटा पहाड़ लगातार हो रही वर्षा के कारण पहाड़ी पूरी तरह कमजोर हो गई थी। सुबह के समय अचानक भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा सड़क पर आ गिरा। कुछ ही मिनटों में बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। प्रशासन के अनुसार बारिश रुकने के बाद भी पहाड़ी से लगातार छोटे-बड़े पत्थर गिरते रहे, जिसके कारण मशीनों से मलबा हटाने का कार्य भी बार-बार बाधित हो रहा है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क पर वाहनों की आवाजाही तत्काल रोक दी गई। 5 किलोमीटर लंबा जाम, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें Rishikesh Badrinath NH 58 Blocked होने के बाद रुद्रप्रयाग और आसपास के इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालु घंटों तक सड़क पर फंसे रहे। कई परिवारों के साथ छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी जाम में परेशान दिखाई दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे ही प्रशासन मलबा हटाता है, कुछ ही देर बाद फिर ऊपर से पत्थर गिरने लगते हैं। यही वजह है कि मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करने में समय लग रहा है। 66 साल पुराना लैंडस्लाइड जोन आज भी बना चुनौती सिरोहबगड़ का लैंडस्लाइड जोन उत्तराखंड की सबसे जटिल भौगोलिक चुनौतियों में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र की चट्टानें लगातार कमजोर होती रही हैं। बरसात के मौसम में यहां मिट्टी और पत्थरों का खिसकना सामान्य घटना बन चुकी है। वर्ष 1960 से लेकर अब तक कई बार इस क्षेत्र में सड़क निर्माण, सुरक्षा दीवारें और ढलान स्थिरीकरण जैसे प्रयास किए गए, लेकिन स्थायी समाधान अब तक सामने नहीं आ सका। हर मानसून में यह क्षेत्र प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन जाता है। ट्रैफिक पुलिस ने संभाला मोर्चा स्थिति गंभीर होने के बाद रुद्रप्रयाग ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू कराया। पुलिसकर्मी लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार यात्रियों को सूचना देते रहे कि फिलहाल मुख्य मार्ग पर आगे बढ़ना सुरक्षित नहीं है। यात्रियों से अपील की गई कि वे प्रशासन द्वारा बताए गए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और किसी भी स्थिति में भूस्खलन क्षेत्र को पार करने का प्रयास न करें। सुरक्षा एजेंसियां लगातार मौके पर मौजूद रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। BRO और प्रशासन की टीमें मलबा हटाने में जुटीं सीमा सड़क संगठन (BRO) और लोक निर्माण विभाग की मशीनें लगातार मलबा हटाने का काम कर रही हैं। हालांकि लगातार बारिश और पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों के कारण राहत कार्य धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा है। जब तक विशेषज्ञ यह सुनिश्चित नहीं कर देते कि पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा कम हो गया है, तब तक मार्ग पूरी तरह नहीं खोला जाएगा। चारधाम यात्रा पर पड़ा असर Rishikesh Badrinath NH 58 Blocked होने का सबसे अधिक असर चारधाम यात्रा पर पड़ा है। बद्रीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को कई स्थानों पर रोकना पड़ा। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले सड़क और मौसम की ताजा जानकारी अवश्य प्राप्त करें। यात्रा मार्गों पर तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार यात्रियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं ताकि किसी प्रकार की अफवाह या भ्रम की स्थिति पैदा न हो। स्थानीय लोगों ने उठाए स्थायी समाधान के सवाल हर वर्ष मानसून के दौरान सिरोहबगड़ में होने वाले भूस्खलन के बाद स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से इस समस्या पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिले। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान संभव नहीं है। वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर दीर्घकालिक योजना तैयार कर इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाया जाना चाहिए ताकि हर मानसून में लोगों को इसी परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रशासन की अपील: मौसम अपडेट देखकर ही करें यात्रा प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा से पहले मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी ताजा एडवाइजरी अवश्य देखें। भारी बारिश की स्थिति में अनावश्यक यात्रा से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि मार्ग खुलने की सूचना केवल आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करें। सुरक्षित यात्रा के लिए सतर्कता जरूरी उत्तराखंड में मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क अवरोध और अचानक मौसम बदलना सामान्य घटनाएं हैं। ऐसे में चारधाम यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं के लिए सावधानी सबसे महत्वपूर्ण है। प्रशासन, पुलिस और BRO की टीमें लगातार हालात सामान्य बनाने में जुटी हैं, लेकिन मौसम की चुनौती को देखते हुए यात्रियों को भी जिम्मेदारी के साथ यात्रा करनी होगी। फिलहाल Rishikesh Badrinath NH 58 Blocked होने से यात्रा प्रभावित है और मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के बाद ही यातायात बहाल किया जाएगा।

उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर चारधाम यात्रा की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। Rishikesh Badrinath NH 58 Blocked होने के बाद हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रुद्रप्रयाग जिले के सिरोहबगड़ लैंडस्लाइड जोन में पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गिर गया, जिससे सड़क पूरी तरह बंद हो गई। देखते ही देखते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया।

यह वही सिरोहबगड़ क्षेत्र है, जिसे पिछले छह दशकों से उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में गिना जाता है। वर्ष 1960 से लगातार दरक रहे इस पहाड़ का स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है। हर मानसून में यहां भूस्खलन होता है और यात्रा मार्ग कई बार बाधित होता है।

भारी बारिश के बाद फिर टूटा पहाड़

लगातार हो रही वर्षा के कारण पहाड़ी पूरी तरह कमजोर हो गई थी। सुबह के समय अचानक भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा सड़क पर आ गिरा। कुछ ही मिनटों में बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

प्रशासन के अनुसार बारिश रुकने के बाद भी पहाड़ी से लगातार छोटे-बड़े पत्थर गिरते रहे, जिसके कारण मशीनों से मलबा हटाने का कार्य भी बार-बार बाधित हो रहा है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क पर वाहनों की आवाजाही तत्काल रोक दी गई।

5 किलोमीटर लंबा जाम, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

Rishikesh Badrinath NH 58 Blocked होने के बाद रुद्रप्रयाग और आसपास के इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालु घंटों तक सड़क पर फंसे रहे। कई परिवारों के साथ छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी जाम में परेशान दिखाई दिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे ही प्रशासन मलबा हटाता है, कुछ ही देर बाद फिर ऊपर से पत्थर गिरने लगते हैं। यही वजह है कि मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करने में समय लग रहा है।

66 साल पुराना लैंडस्लाइड जोन आज भी बना चुनौती

सिरोहबगड़ का लैंडस्लाइड जोन उत्तराखंड की सबसे जटिल भौगोलिक चुनौतियों में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र की चट्टानें लगातार कमजोर होती रही हैं। बरसात के मौसम में यहां मिट्टी और पत्थरों का खिसकना सामान्य घटना बन चुकी है।

वर्ष 1960 से लेकर अब तक कई बार इस क्षेत्र में सड़क निर्माण, सुरक्षा दीवारें और ढलान स्थिरीकरण जैसे प्रयास किए गए, लेकिन स्थायी समाधान अब तक सामने नहीं आ सका। हर मानसून में यह क्षेत्र प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन जाता है।

ट्रैफिक पुलिस ने संभाला मोर्चा

स्थिति गंभीर होने के बाद रुद्रप्रयाग ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू कराया। पुलिसकर्मी लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार यात्रियों को सूचना देते रहे कि फिलहाल मुख्य मार्ग पर आगे बढ़ना सुरक्षित नहीं है।

यात्रियों से अपील की गई कि वे प्रशासन द्वारा बताए गए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और किसी भी स्थिति में भूस्खलन क्षेत्र को पार करने का प्रयास न करें। सुरक्षा एजेंसियां लगातार मौके पर मौजूद रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

BRO और प्रशासन की टीमें मलबा हटाने में जुटीं

सीमा सड़क संगठन (BRO) और लोक निर्माण विभाग की मशीनें लगातार मलबा हटाने का काम कर रही हैं। हालांकि लगातार बारिश और पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों के कारण राहत कार्य धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा है। जब तक विशेषज्ञ यह सुनिश्चित नहीं कर देते कि पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा कम हो गया है, तब तक मार्ग पूरी तरह नहीं खोला जाएगा।

चारधाम यात्रा पर पड़ा असर

Rishikesh Badrinath NH 58 Blocked होने का सबसे अधिक असर चारधाम यात्रा पर पड़ा है। बद्रीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को कई स्थानों पर रोकना पड़ा। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले सड़क और मौसम की ताजा जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

यात्रा मार्गों पर तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार यात्रियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं ताकि किसी प्रकार की अफवाह या भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

स्थानीय लोगों ने उठाए स्थायी समाधान के सवाल

हर वर्ष मानसून के दौरान सिरोहबगड़ में होने वाले भूस्खलन के बाद स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से इस समस्या पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिले।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान संभव नहीं है। वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर दीर्घकालिक योजना तैयार कर इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाया जाना चाहिए ताकि हर मानसून में लोगों को इसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रशासन की अपील: मौसम अपडेट देखकर ही करें यात्रा

प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा से पहले मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी ताजा एडवाइजरी अवश्य देखें। भारी बारिश की स्थिति में अनावश्यक यात्रा से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

अधिकारियों ने यह भी कहा है कि मार्ग खुलने की सूचना केवल आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करें।

सुरक्षित यात्रा के लिए सतर्कता जरूरी

उत्तराखंड में मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क अवरोध और अचानक मौसम बदलना सामान्य घटनाएं हैं। ऐसे में चारधाम यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं के लिए सावधानी सबसे महत्वपूर्ण है। प्रशासन, पुलिस और BRO की टीमें लगातार हालात सामान्य बनाने में जुटी हैं, लेकिन मौसम की चुनौती को देखते हुए यात्रियों को भी जिम्मेदारी के साथ यात्रा करनी होगी।

फिलहाल Rishikesh Badrinath NH 58 Blocked होने से यात्रा प्रभावित है और मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के बाद ही यातायात बहाल किया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button