Ayushman Card Scam: दून अस्पताल में आयुष्मान कार्ड फर्जीवाड़े का खुलासा, दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
Ayushman Card Scam: Ayushman Card fraud exposed at Doon Hospital; case registered against two accused.
Ayushman Card Scam का एक गंभीर मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल से सामने आया है। देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल आयुष्मान भारत योजना के तहत कथित फर्जीवाड़े के खुलासे ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया है। आरोप है कि एक व्यक्ति के नाम पर जारी आयुष्मान कार्ड और पहचान संबंधी दस्तावेजों का उपयोग करके दूसरे व्यक्ति का इलाज कराया गया।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर पुलिस को शिकायत दी गई, जिसके आधार पर दो व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
कैसे सामने आया Ayushman Card Scam?
जानकारी के अनुसार, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत एक मरीज का इलाज चल रहा था। अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार मरीज का नाम अंजित सिंह दर्ज था, जिसने इलाज के लिए आयुष्मान योजना के तहत प्री-ऑथराइजेशन भी प्राप्त किया था।
अस्पताल प्रशासन को तब संदेह हुआ जब डिस्चार्ज प्रक्रिया के दौरान मरीज की पहचान और दस्तावेजों के बीच कुछ विसंगतियां दिखाई दीं। अस्पताल कर्मचारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी।
इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू की, जिससे कथित Ayushman Card Scam का खुलासा हुआ।
सीसीटीवी फुटेज ने खोली फर्जीवाड़े की परतें
मामले की सच्चाई जानने के लिए अस्पताल प्रशासन ने संबंधित वार्ड और विभागों की सीसीटीवी फुटेज खंगाली। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने अधिकारियों को भी चौंका दिया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार फुटेज और दस्तावेजों के मिलान में पता चला कि जिस व्यक्ति का इलाज चल रहा था, वह वास्तविक आयुष्मान कार्ड धारक नहीं था। आरोप है कि अंजित सिंह के नाम पर बने आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल कर मेरठ निवासी विक्की का इलाज कराया जा रहा था।
जांच में सामने आए तथ्यों के बाद अधिकारियों ने दोनों व्यक्तियों से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद पूरे मामले को पुलिस के हवाले कर दिया गया।
अस्पताल प्रशासन ने दर्ज कराई शिकायत
Ayushman Card Scam सामने आने के बाद राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एन.सी. बिष्ट ने नगर कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत में बताया गया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकारी धन और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए कथित रूप से गलत पहचान का इस्तेमाल किया गया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यदि समय रहते यह मामला पकड़ में नहीं आता तो सरकारी योजना का दुरुपयोग जारी रह सकता था।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
शिकायत मिलने के बाद देहरादून पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार गोविंदगढ़ निवासी अंजित सिंह और मेरठ के हस्तिनापुर निवासी विक्की के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला धोखाधड़ी और पहचान छिपाकर सरकारी योजना का लाभ लेने से जुड़ा प्रतीत होता है। इसलिए सभी तथ्यों की विस्तार से जांच की जा रही है।
मामले की विवेचना संबंधित जांच अधिकारी को सौंप दी गई है और पुलिस दोनों आरोपियों से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
आयुष्मान भारत योजना की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
Ayushman Card Scam की घटना ने आयुष्मान भारत योजना के सत्यापन तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से बचने के लिए अस्पतालों में पहचान सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाए जाने की आवश्यकता है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल की सतर्कता के कारण ही यह मामला समय रहते पकड़ में आ गया। यदि जांच नहीं की जाती तो सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग जारी रह सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल पहचान प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाकर ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग कर सकता है व्यापक समीक्षा
इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। सूत्रों के अनुसार विभाग आयुष्मान योजना के अंतर्गत होने वाले सत्यापन और प्री-ऑथराइजेशन की प्रक्रिया की समीक्षा कर सकता है।
अधिकारियों का मानना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे, इसके लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से अस्पतालों में दस्तावेज सत्यापन और पहचान जांच की प्रक्रिया को और सख्त किया जा सकता है।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल Ayushman Card Scam मामले में पुलिस और अस्पताल प्रशासन दोनों स्तरों पर जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला न केवल एक अस्पताल तक सीमित है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग न हो, इसके लिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।


