उत्तराखंड

Uttarakhand NFHS Report 2026: स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति और चुनौतियों की तस्वीर

Uttarakhand NFHS Report 2026: A Snapshot of Progress and Challenges in Health Services

Uttarakhand NFHS Report 2026 ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जिसमें उपलब्धियां भी हैं और चुनौतियां भी। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 के ताजा आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण और प्रसवोत्तर देखभाल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। वहीं दूसरी ओर बच्चों के पोषण, शुरुआती स्तनपान और केवल मां का दूध देने जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य आदतों में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Uttarakhand NFHS Report 2026 राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझने और भविष्य की नीतियों को दिशा देने में मदद करेगा।

गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

रिपोर्ट के अनुसार गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में पहले की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि महिलाएं अब स्वास्थ्य सेवाओं तक पहले से अधिक पहुंच बना पा रही हैं।

इसके अलावा कम से कम चार बार प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह से गर्भावस्था से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सकता है और मां एवं शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर बनाया जा सकता है।

हालांकि आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों के नियमित सेवन को लेकर अभी भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए हैं। यह क्षेत्र अभी भी स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है।

Uttarakhand NFHS Report 2026 में संस्थागत प्रसव की बढ़ी दर

रिपोर्ट की सबसे सकारात्मक उपलब्धियों में से एक संस्थागत प्रसव में हुई बढ़ोतरी है। राज्य में अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसवों का प्रतिशत लगातार बढ़ा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि महिलाएं अब सुरक्षित प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थानों पर अधिक भरोसा कर रही हैं।

कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में होने वाले प्रसवों की संख्या भी बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मातृ मृत्यु दर और नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी।

हालांकि रिपोर्ट में सीजेरियन डिलीवरी के बढ़ते मामलों का भी उल्लेख किया गया है। निजी अस्पतालों में इसकी दर अपेक्षाकृत अधिक पाई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस विषय पर विस्तृत अध्ययन और निगरानी की आवश्यकता है।

Uttarakhand NFHS Report 2026 में प्रसवोत्तर देखभाल की स्थिति बेहतर

Uttarakhand NFHS Report 2026 के अनुसार प्रसव के बाद मां और नवजात शिशु की देखभाल से जुड़ी सेवाओं में भी सुधार दर्ज किया गया है। प्रसव के 48 घंटे के भीतर स्वास्थ्य जांच कराने वाली माताओं का प्रतिशत बढ़ा है।

नवजात शिशुओं को भी जन्म के शुरुआती दिनों में स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तुलना में अधिक मिल रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि शुरुआती स्वास्थ्य जांच नवजात शिशुओं में संक्रमण और अन्य जटिलताओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह सुधार स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है।

Uttarakhand NFHS Report 2026 में टीकाकरण अभियान की बड़ी सफलता

राज्य के लिए सबसे उत्साहजनक खबर बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी है। Uttarakhand NFHS Report 2026 बताती है कि पूर्ण टीकाकरण प्राप्त करने वाले बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

विशेष रूप से रोटावायरस वैक्सीन की कवरेज में बड़ा सुधार दर्ज किया गया है। इसके अलावा पोलियो, बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी और खसरा टीकाकरण कार्यक्रमों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लगातार चलाए गए जागरूकता अभियानों, स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत और टीकाकरण कार्यक्रमों की प्रभावी निगरानी का सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

Uttarakhand NFHS Report 2026 में पोषण की स्थिति में सुधार

बच्चों में कुपोषण से जुड़े कई संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग) की दर में कमी आई है। कम वजन और अत्यधिक दुबले बच्चों की संख्या भी पहले की तुलना में घटी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनबाड़ी सेवाओं, पोषण अभियानों और सरकारी योजनाओं का लाभ अब धीरे-धीरे जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। फिर भी हर पांचवां बच्चा पोषण संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो चिंता का विषय बना हुआ है।

Uttarakhand NFHS Report 2026 में स्तनपान से जुड़े आंकड़े चिंताजनक

जहां कई क्षेत्रों में सुधार दर्ज किया गया है, वहीं स्तनपान से जुड़े आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने वाली माताओं की संख्या में कमी आई है।

इसके अलावा छह महीने तक केवल मां का दूध पाने वाले बच्चों का प्रतिशत भी घटा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के शुरुआती विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए स्तनपान बेहद महत्वपूर्ण है।

इसलिए आने वाले समय में स्तनपान को लेकर जागरूकता अभियान चलाने और परिवारों को इसके लाभों के बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता है।

किशोर मातृत्व और बाल विवाह में आई कमी

Uttarakhand NFHS Report 2026 के अनुसार सामाजिक स्तर पर भी कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। कम उम्र में विवाह करने वाली महिलाओं की संख्या में कमी आई है। साथ ही किशोरावस्था में मातृत्व के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे शिक्षा के बढ़ते स्तर, जागरूकता अभियानों और सामाजिक बदलावों का परिणाम मानते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आगे की राह

Uttarakhand NFHS Report 2026 यह दर्शाती है कि उत्तराखंड ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण और प्रसवोत्तर देखभाल के क्षेत्र में राज्य का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।

हालांकि स्तनपान, पोषण और आयरन-फोलिक एसिड सेवन जैसे क्षेत्रों में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ पोषण शिक्षा, व्यवहार परिवर्तन और जनजागरूकता पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य संकेतकों के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

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