उत्तराखंड की हरित छलांग, ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी 2026 को कैबिनेट की मंजूरी, 2030 तक 100 किलो टन उत्पादन का लक्ष्य
Uttarakhand takes a green leap: Cabinet approves Green Hydrogen Policy 2026, aiming for 100 kilotons of production by 2030.
देहरादून: जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आज पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए जहां विकसित और विकासशील देश ठोस कदम उठा रहे हैं, वहीं भारत ने भी वर्ष 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में केंद्र सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा और दूरदर्शी फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड हरित हाइड्रोजन पॉलिसी–2026 को मंजूरी दे दी है, जिससे राज्य स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की ओर बढ़ गया है।
ग्रीन हाइड्रोजन क्यों है जरूरी?
ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की ऊर्जा माना जा रहा है। यह ऐसा ईंधन है, जिसके उत्पादन और उपयोग के दौरान कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है। पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में ग्रीन हाइड्रोजन पर्यावरण के लिए कहीं अधिक सुरक्षित है। यही कारण है कि भारत सरकार ने वर्ष 2022 में राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति और 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत की थी। इन पहलों के तहत सभी राज्यों को प्रोत्साहित किया गया कि वे अपनी-अपनी ग्रीन हाइड्रोजन नीतियां तैयार करें।
उत्तराखंड को क्यों मिल सकता है बड़ा फायदा?
उत्तराखंड के पास जलविद्युत और सौर ऊर्जा जैसे प्रचुर प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। इन्हीं नवीकरणीय स्रोतों से हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाएगा, जिससे राज्य को ऊर्जा उत्पादन के लिए बाहरी संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नीति लागू होने के बाद स्टील, रिफाइनरी, उर्वरक, सीमेंट और अन्य भारी उद्योगों में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा, बल्कि औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
2030 तक 100 किलो टन उत्पादन का लक्ष्य
हरित हाइड्रोजन पॉलिसी 2026 के तहत उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2030 तक हर साल 100 किलो टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। परियोजनाओं का आवंटन केंद्र और राज्य की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को नामांकन के आधार पर, जबकि निजी कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए दिया जाएगा। इससे पारदर्शिता के साथ निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
उद्योगों को मिलेंगी बड़ी रियायतें
नीति के तहत राज्य सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई अहम प्रोत्साहनों का ऐलान किया है। ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्रों को उद्योग का दर्जा दिया जाएगा, जिससे वे एमएसएमई नीति 2023, मेगा औद्योगिक एवं निवेश नीति 2021 और अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज दिशानिर्देश 2023 के तहत मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
परिवहन और उद्योग में बदलेगा भविष्य
ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, वर्तमान में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में किया जा रहा है, लेकिन आने वाले समय में यह ट्रांसपोर्टेशन फ्यूल के रूप में भी अहम भूमिका निभाएगा। शिपिंग सेक्टर में इसका प्रयोग शुरू हो चुका है और भविष्य में ट्रेन, ट्रक और यहां तक कि विमान में भी ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। भारतीय रेलवे पहले ही हरियाणा में ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन का प्रयोग कर चुका है।
हरित भविष्य की ओर उत्तराखंड
उत्तराखंड हरित हाइड्रोजन पॉलिसी 2026 न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह राज्य को ऊर्जा, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की नींव भी रखती है। आने वाले वर्षों में यह नीति उत्तराखंड को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

