उत्तराखंड में UCC के एक साल, तकनीक और AI से बदली नागरिक सेवाओं की प्रक्रिया
One year of UCC in Uttarakhand, Technology and AI have transformed the process of citizen services.
देहरादून: उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) को एक वर्ष पूरा हो गया है। बीते एक साल में यह कानून केवल सामाजिक सुधार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल गवर्नेंस और तकनीकी नवाचार का भी मजबूत उदाहरण बनकर सामने आया है। राज्य सरकार का कहना है कि UCC को इस तरह लागू किया गया है कि आम नागरिक बिना किसी कठिनाई के इसकी प्रक्रिया को समझ सके और सेवाओं का लाभ उठा सके।
AI आधारित सिस्टम से आसान हुई जानकारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने UCC की वर्षगांठ पर इसकी उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां UCC को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सरल बनाया गया है। AI आधारित प्रणाली नागरिकों को नियमों, प्रक्रियाओं और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी क्रमबद्ध तरीके से देती है, जिससे कानूनी प्रक्रिया को समझना आसान हो गया है।
23 भाषाओं में उपलब्ध हैं UCC सेवाएं
UCC की एक बड़ी खासियत इसका बहुभाषी स्वरूप है। इसकी सेवाएं अंग्रेजी के साथ-साथ संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई गई हैं। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि के लोग अपनी मातृभाषा में नियम पढ़ सकते हैं और आवेदन कर सकते हैं, जिससे भाषा किसी तरह की बाधा नहीं बनती।
ऑनलाइन पंजीकरण से खत्म हुई दफ्तरों की दौड़
UCC के तहत पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। नागरिक मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से खुद आवेदन कर सकते हैं। दस्तावेजों की संख्या सीमित रखी गई है और वेबसाइट को यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है, ताकि तकनीक से कम परिचित लोग भी आसानी से प्रक्रिया पूरी कर सकें।
सरलीकरण और पारदर्शिता पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री धामी के अनुसार, सरकार ने शुरुआत से ही “सरलीकरण से समाधान” की नीति अपनाई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि UCC की प्रक्रिया जटिल न हो और हर वर्ग के नागरिक के लिए सुलभ रहे। यही वजह है कि एक साल में UCC से जुड़ी कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है।
तकनीकी उत्कृष्टता का उदाहरण बना UCC
राज्य सरकार का मानना है कि UCC की कार्यप्रणाली तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक है। वेबसाइट कम इंटरनेट स्पीड पर भी सुचारु रूप से काम करती है और AI आधारित मार्गदर्शन प्रणाली आवेदन के दौरान होने वाली गलतियों को कम करती है। इससे समय और संसाधनों दोनों की बचत हो रही है।
अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड का UCC मॉडल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। कानून और तकनीक का यह संतुलित उपयोग प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ नागरिकों का भरोसा भी मजबूत करता है।

