उत्तराखंड में राशन कार्ड ई-केवाईसी अधूरी, 80 फीसदी पर अटका डिजिटलाइजेशन अभियान
In Uttarakhand, ration card e-KYC is incomplete, with the digitalization campaign stalled at 80 percent.
देहरादून। उत्तराखंड में राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने और अपात्र लोगों को मिलने वाले सरकारी राशन पर रोक लगाने के उद्देश्य से शुरू किया गया राशन कार्ड ई-केवाईसी अभियान अभी तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। लंबा समय बीत जाने के बावजूद प्रदेश में केवल करीब 80 प्रतिशत राशन कार्डों की ही ई-केवाईसी पूरी हो सकी है, जिससे अब भी कई पात्र लाभार्थियों के राशन से वंचित होने की आशंका बनी हुई है।
कनेक्टिविटी और संसाधनों की बनी बाधा
खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी, तकनीकी संसाधनों और स्टाफ की कमी के चलते ई-केवाईसी की प्रक्रिया अपेक्षित गति से पूरी नहीं हो पाई। ग्रामीण इलाकों में आधार सत्यापन, बायोमेट्रिक मशीनों की खराबी और इंटरनेट की समस्या इस अभियान में सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई।
केंद्र सरकार के निर्देश पर शुरू हुआ था अभियान
भारत सरकार के निर्देशों के तहत प्रदेश में पिछले वर्ष राशन कार्डों को पूरी तरह डिजिटल करने के लिए ई-केवाईसी अभियान शुरू किया गया था। इसका मकसद अंत्योदय और प्रायोरिटी हाउसहोल्ड (PHH) श्रेणी के वास्तविक और पात्र लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करना था। हालांकि, प्रक्रिया के दौरान लगातार आ रही शिकायतों और नकारात्मक फीडबैक के चलते राज्य सरकार ने ई-केवाईसी की समय-सीमा दो बार बढ़ाई।
डेडलाइन गुजरने के बाद भी लक्ष्य अधूरा
ई-केवाईसी की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2025 तय की गई थी, लेकिन वर्ष 2025 समाप्त होने और जनवरी 2026 का आधा महीना बीत जाने के बाद भी प्रदेश में यह कार्य पूरा नहीं हो सका। खाद्य आपूर्ति विभाग के अनुसार, फिलहाल डिजिटलाइजेशन का आंकड़ा 80 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है।
मंत्री ने जताई नाराजगी
खाद्य आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने इस स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ई-केवाईसी का मुख्य उद्देश्य राशन वितरण में पारदर्शिता लाना और डुप्लीकेसी, फर्जीवाड़े व धांधली पर रोक लगाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल वास्तविक लाभार्थियों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, इसके लिए डिजिटल सत्यापन बेहद जरूरी है।
बायोमेट्रिक और रेटिना स्कैन से हो रहा सत्यापन
मंत्री ने बताया कि ई-केवाईसी प्रक्रिया के तहत लाभार्थियों की पहचान बायोमेट्रिक और आंख की रेटिना स्कैनिंग के जरिए की जा रही है, ताकि एक ही व्यक्ति को एक ही राशन कार्ड का लाभ मिले और उसका डाटा सरकार के डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित दर्ज हो सके।
राशन से वंचित नहीं होगा कोई पात्र व्यक्ति
रेखा आर्या ने भरोसा दिलाया कि जो लोग ई-केवाईसी पूरी नहीं कर पाए हैं, उनके मामलों की अलग-अलग जांच की जाएगी। गंभीर बीमारी, दिव्यांगता या तकनीकी कारणों से सत्यापन में असमर्थ रहे लाभार्थियों को पहले ही छूट दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति को राशन से वंचित नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इस विषय में केंद्र सरकार से भी समन्वय किया जाएगा।



