उत्तराखंड

अंकिता भंडारी हत्याकांड फिर गरमाया, 11 जनवरी को ‘उत्तराखंड बंद’ का ऐलान

The Ankita Bhandari murder case has flared up again; a 'Uttarakhand bandh' has been announced for January 11.

उत्तराखंड में साल 2022 में हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड ने एक बार फिर पूरे प्रदेश की राजनीति और समाज को झकझोर दिया है। लंबे समय तक शांत नजर आ रहा यह मामला अचानक फिर से सुर्खियों में आ गया है। प्रदेशभर में आक्रोश का माहौल है और सड़कों पर लोगों की भीड़ न्याय की मांग को लेकर उतर रही है। विपक्षी दलों के साथ-साथ आम नागरिक भी सरकार से जवाब मांग रहे हैं। इसी बढ़ते दबाव के बीच अब 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया है।

अंकिता के पिता ने किया उत्तराखंड बंद का आह्वान

अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी ने खुद सामने आकर प्रदेशवासियों से 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अंकिता सिर्फ उनकी बेटी नहीं थी, बल्कि पूरे देश की बेटी थी। उसे न्याय दिलाना केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। वीरेंद्र भंडारी ने विशेष रूप से व्यापारी वर्ग और सामाजिक संगठनों से अपील करते हुए कहा कि बंद को सफल बनाकर सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाई जाए।

‘न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई’

वीरेंद्र भंडारी ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक अंकिता को पूरा और निष्पक्ष न्याय नहीं मिल जाता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल के दबाव में नहीं, बल्कि एक पिता के तौर पर अपनी बेटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जांच निष्पक्ष होती, तो आज भी जनता को सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती।

उर्मिला सनावर के बयानों पर कार्रवाई की मांग

हाल के दिनों में खुद को सुरेश राठौर की पत्नी बताने वाली उर्मिला सनावर द्वारा जारी किए गए वीडियो और कथित ऑडियो क्लिप ने पूरे मामले को फिर से गर्मा दिया है। इन वीडियो में अंकिता हत्याकांड से जुड़े कुछ गंभीर दावे किए गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि अभी तक उनकी उर्मिला सनावर से कोई व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई है, लेकिन वह चाहते हैं कि उनके बयानों के आधार पर निष्पक्ष जांच हो और जो भी तथ्य सामने आएं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।

क्यों फिर भड़का जनआक्रोश?

दरअसल, उर्मिला सनावर द्वारा जारी ऑडियो में कथित तौर पर अंकिता हत्याकांड से जुड़े संवेदनशील पहलुओं का जिक्र किया गया है। इसके बाद कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। जगह-जगह धरना-प्रदर्शन हुए और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया। इसी बढ़ते जनदबाव के बीच उत्तराखंड बंद का फैसला लिया गया।

सरकार की प्रतिक्रिया भी आई सामने

इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी हाल ही में बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि सरकार किसी भी तरह की जांच से पीछे नहीं हटेगी और जो भी आवश्यक होगा, वह किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह स्वयं अंकिता के माता-पिता से मुलाकात करेंगे और उनकी बात सुनेंगे। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि बयानबाजी से आगे बढ़कर अब ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

प्रदेश में तनावपूर्ण माहौल

11 जनवरी को प्रस्तावित उत्तराखंड बंद को लेकर प्रशासन भी सतर्क हो गया है। पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। वहीं, आम लोगों के मन में सवाल है कि क्या इस बंद के बाद सरकार कोई बड़ा कदम उठाएगी या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

नजरें अब 11 जनवरी पर!

फिलहाल, पूरे उत्तराखंड की निगाहें 11 जनवरी पर टिकी हैं। यह बंद सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि उस पीड़ा और आक्रोश की अभिव्यक्ति है, जो अंकिता भंडारी के परिवार और प्रदेश की जनता के दिल में है। अब देखना यह होगा कि यह जनदबाव जांच की दिशा और गति को कितना बदल पाता है।

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