पौड़ी गढ़वाल के सुमित नेगी की गोवा अग्निकांड में दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम
Sumit Negi from Pauri Garhwal tragically died in the Goa fire incident, plunging his village into mourning.
पौड़ी गढ़वाल: गोवा के एक होटल परिसर में रविवार को हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में पाबौ ब्लॉक के छानी गांव निवासी 31 वर्षीय सुमित नेगी पुत्र गजेन्द्र सिंह नेगी की मौत हो गई। सूचना मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। जिला पंचायत सदस्य कलूणूण भरत रावत ने बताया कि देर शाम जैसे ही हादसे की खबर गांव पहुंची, हर ओर मातम और चिंता का माहौल बन गया।
परिवार और ग्रामीणों में चिंता, शव लाने के लिए किए गए प्रयास
दुर्घटना की सूचना मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुमित का पार्थिव शरीर गोवा से गांव लाना था। इसको लेकर प्रशासन से लगातार संपर्क बनाया गया। विभिन्न स्तरों पर प्रयासों के बाद सरकार की पहल से सुमित का शव गोवा से दिल्ली हवाई मार्ग से लाया गया, जिसके बाद एम्बुलेंस के माध्यम से हरिद्वार पहुंचाया गया। परिवार को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन गम का माहौल अब भी भारी है। हरिद्वार में पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
नाइट क्लब में लगी आग ने छीनी कई परिवारों की खुशियां
गोवा के एक नाइट क्लब में रविवार रात अचानक लगी भीषण आग में 9 लोगों की मौत हो गई, जिनमें उत्तराखंड के पांच युवक भी शामिल थे। मृतकों की पहचान जितेंद्र सिंह, सुमित नेगी, मनीष सिंह, सतीश सिंह और सुरेंद्र सिंह के रूप में हुई। ये सभी वहां कर्मचारी के रूप में काम करते थे। इसके अलावा दिल्ली के विनोद कबड़वाल, कमला कबड़वाल, अनीता जोशी और सरोज जोशी भी इस हादसे में जान गंवा बैठे। बताया गया कि वे गोवा घूमने गए थे।
सिर्फ तीन महीने पहले गोवा गए थे सुमित, परिवार की जिम्मेदारी थी कंधों पर
छानी गांव के सुमित पिछले करीब तीन महीने से गोवा के होटल में कार्यरत थे। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में गहरा दुख छा गया। ग्रामीणों के अनुसार, किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि गांव का सबसे चहेता युवक अब दुनिया में नहीं रहा।
आठ महीने की बेटी को छोड़ गई जिंदगी की सबसे बड़ी टीस
सुमित अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और मात्र 8 महीने की मासूम बेटी को छोड़ गए हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे होने के कारण वे परिवार के बेहद लाड़ले थे। उनकी असमय मृत्यु से परिवार पूरी तरह टूट चुका है। गांव में हर आंख नम है और लोग इस दर्दनाक घटना को लेकर बेहद व्यथित हैं। उत्तराखंड के अन्य युवकों के निधन की खबर के बाद पूरे प्रदेश में भी शोक की भावना व्याप्त है।
यह हादसा न सिर्फ कई परिवारों को उजाड़ गया, बल्कि यह भी दिखा गया कि रोजगार की तलाश में दूर प्रदेशों में काम कर रहे युवाओं का जीवन किस तरह जोखिमों से भरा होता है।



