उत्तराखंड

यमुनोत्री धाम पैदल मार्ग की मरम्मत शुरू, चारधाम यात्रा से पहले तैयारी तेज

Repair work begins on the Yamunotri Dham trekking route, preparations intensify ahead of the Char Dham Yatra.

कपाट बंद होने के बाद मरम्मत कार्यों को मिली रफ्तार

उत्तरकाशी: भैया दूज के अवसर पर 23 अक्टूबर को यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं। अब जब क्षेत्र में मौसम साफ और अनुकूल है, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने आगामी चारधाम यात्रा के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग की मरम्मत और सुधार कार्यों को गति दी है, जिससे अगले यात्रा सत्र में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।


मानसून में क्षतिग्रस्त हुआ था पैदल मार्ग

इस वर्ष मानसून के दौरान यमुनोत्री क्षेत्र में लगातार भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से सड़क और पैदल मार्ग दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचा था। कई स्थानों पर रास्ते धंस गए थे, जिससे तीर्थयात्रियों की आवाजाही बाधित रही। यहां तक कि कई बार सुरक्षा कारणों से यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। मानसून समाप्त होने के बाद भी यात्रा का दबाव बना रहने से मार्गों की मरम्मत पूरी तरह संभव नहीं हो पाई थी।


PWD ने शुरू किया चौड़ीकरण और सुरक्षा कार्य

कपाट बंद होने और यातायात ठप रहने के कारण अब विभाग को कार्य सुचारू रूप से करने का अवसर मिला है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता तरुण काम्बोज ने बताया कि “मौसम अनुकूल है, इसलिए यमुनोत्री पैदल मार्ग के सुधारीकरण का कार्य तेज गति से चल रहा है। हमारा उद्देश्य है कि अगले यात्रा सत्र से पहले यह मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और सुगम हो।” विभाग के अनुसार, इस दौरान कई स्थानों पर संकरे रास्तों की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है और ढलानों को स्थायी रूप से मजबूत किया जा रहा है।


तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

PWD द्वारा पैदल मार्ग पर नए सुरक्षात्मक दीवारों और रेलिंग संरचनाओं का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे फिसलन और भूस्खलन की संभावनाओं को कम किया जा सके। विभाग का कहना है कि इस बार सुधार कार्यों में टिकाऊ सामग्री और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है ताकि यह मार्ग लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।


इस वर्ष 6.45 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 6,45,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन किए। यमुनोत्री मंदिर समिति को श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान से लगभग 50 लाख रुपये की आय हुई। हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में यात्रियों की संख्या में मामूली गिरावट रही, जिसका मुख्य कारण मौसम की प्रतिकूलता बताया गया है।


स्थानीय उम्मीदें और यात्रा की तैयारी

स्थानीय लोगों का मानना है कि विभाग द्वारा किए जा रहे सुधार कार्यों से अगले यात्रा सत्र में क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग के प्रयास यमुनोत्री यात्रा को और भी यादगार बनाने की दिशा में एक अहम कदम हैं।

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