चुनाव आयोग पर उठे सवाल, कांग्रेस सेवा दल ने डीएम के माध्यम से सौंपा ज्ञापन
Questions raised on Election Commission, Congress Seva Dal submitted memorandum through DM
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस सेवा दल ने मंगलवार को जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार को ज्ञापन सौंपते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। संगठन ने कहा कि जब विपक्ष के शीर्ष नेता राहुल गांधी से शपथ पत्र मांगा जा सकता है, तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्वयं चुनाव आयोग को भी मतदाता सूची की शुचिता पर शपथ पत्र देना चाहिए।
7 दिन में शपथ पत्र सार्वजनिक करने की मांग
कांग्रेस सेवा दल के अतिरिक्त मुख्य संगठक और उपाध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने ज्ञापन में कहा कि चुनाव आयोग को सात दिनों के भीतर यह शपथ पत्र सार्वजनिक करना चाहिए कि मतदाता सूची में किसी प्रकार की गड़बड़ी या हेरफेर नहीं की गई है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह माना जाएगा कि मतदाता सूची में अनियमितताएं आयोग की मिलीभगत से हुई हैं।
पारदर्शिता पर जोर
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास तभी कायम रह सकता है जब चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो। संगठन ने सवाल उठाया कि जब विपक्ष के नेता से शपथ पत्र लिया जा सकता है, तो फिर जनता को भरोसा दिलाने के लिए चुनाव आयोग पर भी समान जवाबदेही लागू होनी चाहिए।
प्रतिनिधि मंडल की मौजूदगी
ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस सेवा दल के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें पूर्व मेयर प्रत्याशी वीरेंद्र पोखरियाल, अधिवक्ता पुनीत चौधरी, अतिरिक्त मुख्य संगठक मनमोहन शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष ललित भद्री, वरिष्ठ अधिवक्ता विलियम अकबरच, पूर्व पार्षद विकास चौहान, रामपाल भारती, महानगर अध्यक्ष सावित्री थापा, प्रभात डरिपाल, और अधिवक्ता सुरेश यादव प्रमुख रूप से शामिल रहे।
“चुनाव की पवित्रता सर्वोपरि”
प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव की पवित्रता सर्वोपरि है। यदि चुनाव आयोग पर ही सवाल उठने लगेंगे तो यह जनता के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि पारदर्शिता ही लोकतंत्र की नींव है और इसी पर भरोसा कायम रखने के लिए आयोग को जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
कांग्रेस सेवा दल के इस कदम के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे लोकतंत्र को बचाने की पहल बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे महज राजनीतिक स्टंट करार दे सकता है। हालांकि, इस ज्ञापन ने एक बार फिर मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर चर्चा छेड़ दी है।
