धराली त्रासदी में खोज का नया चरण, जीपीआर तकनीक से लापता लोगों की तलाश
New phase of search in Dharali tragedy, search for missing people with GPR technology
उत्तरकाशी, उत्तराखंड: उत्तरकाशी जिले के बाढ़ प्रभावित धराली गांव में लापता 66 लोगों को खोजने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। नेशनल जियोग्राफिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनजीआरआई) की विशेषज्ञ टीम ने मंगलवार को ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) से संभावित क्षेत्रों की स्कैनिंग शुरू कर दी है। लापता लोगों में 24 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं। यह तकनीक मलबे और कीचड़ के नीचे दबे संभावित मानव अवशेषों का पता लगाने में मदद करेगी।
तकनीक से मिली नई उम्मीद
जीपीआर एक उन्नत भू-भौतिकीय तकनीक है, जो रेडियो तरंगों के माध्यम से सतह के नीचे की संरचनाओं का पता लगाती है। एनजीआरआई अधिकारियों के अनुसार, यह उपकरण पानी, कीचड़ और कठिन भू-भाग में भी सटीक काम कर सकता है। इससे बचाव दल को मलबे में छिपे विसंगतियों की पहचान कर खोज अभियान को दिशा देने में मदद मिलेगी। इसी तकनीक का सफल उपयोग इस साल फरवरी में तेलंगाना के एसएलबीसी सुरंग हादसे में भी किया गया था।
धराली में विशेषज्ञों की तैनाती
एनजीआरआई की टीम सोमवार शाम धराली पहुंची और मंगलवार सुबह से संभावित क्षेत्रों का सर्वे शुरू किया। इस मिशन में स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और सेना के बचावकर्मी सक्रिय सहयोग कर रहे हैं।
66 लोग अब भी लापता
गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे के अनुसार, 5 अगस्त की बाढ़ आपदा के बाद से 66 लोग अब तक लापता हैं। इनमें 24 नेपाली मजदूर, 9 सैनिक, धराली गांव के 8 निवासी, आसपास के 5 लोग, टिहरी का 1 व्यक्ति, बिहार के 13 और उत्तर प्रदेश के 6 लोग शामिल हैं। हाल ही में गांव के एक युवक का शव बरामद हुआ, लेकिन बाकी का कोई सुराग नहीं है।
राहत और पुनर्वास कार्य
प्रभावित परिवारों को तत्काल 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। प्रशासन ने एक विस्तृत पुनर्वास योजना तैयार की है, जिसमें लंबे समय तक सहायता देने की व्यवस्था होगी। खाद्यान्न, कपड़े, गमबूट, स्लीपिंग बैग और अन्य आवश्यक सामग्री भी वितरित की जा रही है।
बचाव अभियान में सफलता और चुनौतियां
अब तक हवाई और जमीनी अभियानों से 1300 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के दल मौसम की कठिनाइयों के बावजूद लगातार राहत कार्य कर रहे हैं। इसी बीच सड़क बहाली कार्य के दौरान एक जेसीबी ऑपरेटर नदी में गिरकर लापता हो गया, जो इस क्षेत्र में काम की जोखिमभरी स्थिति को दर्शाता है।
आगे की रणनीति
धराली त्रासदी ने फिर से यह सवाल खड़ा किया है कि पहाड़ी और नदी किनारे के इलाकों में निर्माण कार्यों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञ मानते हैं कि भूस्खलन और बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में निर्माण नीतियों की समीक्षा जरूरी है। जीपीआर जैसी तकनीकें लापता लोगों की खोज में नई उम्मीदें जगाती हैं, और धराली के लोग अब भी अपने प्रियजनों के लौटने की आस में हैं।



