नई दिल्ली, 24 जून 2025: केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए यूपीएस (एकीकृत पेंशन स्कीम) चुनने की अंतिम तिथि को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब वे केंद्रीय कर्मचारी जो एनपीएस (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) के बजाय यूपीएस को अपनाना चाहते हैं, वे 30 सितंबर 2025 तक अपना विकल्प दर्ज कर सकते हैं। इससे पहले यह अंतिम तिथि 30 जून 2025 तय की गई थी।
वित्त मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना
वित्त मंत्रालय ने 23 जून को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में इस तिथि विस्तार की घोषणा की। मंत्रालय के अनुसार, कई कर्मचारियों और संगठनों ने सरकार से समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिसे ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह राहत सिर्फ उन कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों और मृतक सेवानिवृत्त कर्मियों के वैध रूप से विवाहित जीवनसाथियों को दी गई है जो यूपीएस के लिए पात्र हैं।
किन्हें मिलेगा विकल्प चुनने का अधिकार?
सरकार ने तीन श्रेणियों के कर्मचारियों को यह विकल्प प्रदान किया है:
- वे कर्मचारी जो 1 अप्रैल 2025 तक सरकारी सेवा में नियुक्त होंगे।
- वे कर्मी जो 31 मार्च 2025 तक सेवानिवृत्त हो चुके होंगे, बशर्ते उन्होंने कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी की हो या किसी विशेष शर्त के तहत सेवानिवृत्त हुए हों।
- वे मृतक कर्मियों के कानूनी रूप से विवाहित जीवनसाथी, जो सेवानिवृत्त अवस्था में थे और पात्रता रखते थे।
नए कर्मचारियों के लिए अलग नियम
नए भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए नियम स्पष्ट है कि उन्हें सरकारी सेवा में शामिल होने की 30 दिनों की अवधि के भीतर यूपीएस या एनपीएस में से किसी एक योजना का चुनाव करना होगा। यदि कोई कर्मचारी तय समय में विकल्प नहीं देता, तो उसे डिफॉल्ट रूप से एनपीएस में शामिल कर दिया जाएगा। एक बार चुनाव हो जाने के बाद विकल्प बदला नहीं जा सकता।
एनपीएस और यूपीएस में क्या है अंतर?
एनपीएस एक बाजार आधारित पेंशन योजना है, जिसमें गारंटीकृत मासिक पेंशन नहीं मिलती, बल्कि रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। दूसरी ओर, यूपीएस एक सुनिश्चित पेंशन योजना है, जिसमें कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित मासिक पेंशन और एकमुश्त राशि मिलती है। साथ ही इसमें ग्रेच्युटी लाभ भी शामिल होता है।
यदि कोई कर्मचारी एनपीएस से यूपीएस में स्थानांतरित होता है, तो उसकी पेंशन राशि को यूपीएस के तहत टैग किए गए PRAN (स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या) में ट्रांसफर किया जाएगा।
सरकार का यह कदम कर्मचारियों को पेंशन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है।

