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उत्तराखंड पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर बवाल, कांग्रेस नेता नवप्रभात ने सरकार पर साधा निशाना

Ruckus over reservation in Uttarakhand Panchayat elections, Congress leader Navprabhat targeted the government

विकासनगर, 16 जून 2025 — उत्तराखंड में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले आरक्षण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों से बड़ी संख्या में आरक्षण सूची पर आपत्तियां सामने आ रही हैं। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात ने राज्य सरकार पर मनमाने ढंग से आरक्षण तय करने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।

राज्य में पंचायत चुनाव की तैयारी तेज़ हो गई है और आरक्षण सूची को लेकर दावे-आपत्तियों का दौर भी जारी है। 18 जून तक संशोधित आरक्षण सूची जारी की जानी है, लेकिन उससे पहले ही कई पंचायतों में संभावित प्रत्याशी व विपक्षी दलों की तरफ से आरक्षण में पारदर्शिता की मांग की जा रही है।

कांग्रेस ने बताया आरक्षण में गंभीर खामियां

कांग्रेस नेता नवप्रभात ने विशेष रूप से विकासनगर विकासखंड की कुछ पंचायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग की सीटों की संख्या असमान्य रूप से बढ़ाई गई है, जबकि अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सीटों को घटा दिया गया है। उन्होंने इसे सत्ता पक्ष की राजनीतिक मंशा से प्रेरित कार्रवाई करार दिया।

2011 जनगणना को बनाया गया आधार

नवप्रभात ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया गया है, जबकि पिछले आरक्षण में जो आधार तय था, उसमें बहुत अधिक बदलाव नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि इस आधार पर कुछ पंचायतों में आरक्षण की स्थिति पूरी तरह बदल दी गई है, जिससे कई जनप्रतिनिधियों और मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

सरकार पर लगाया पक्षपात का आरोप

पूर्व मंत्री ने कहा कि आरक्षण का मकसद सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना होता है, न कि किसी वर्ग विशेष को राजनीतिक लाभ पहुंचाना। लेकिन सरकार जिस तरह से आरक्षण सूची में जातिगत समीकरणों से छेड़छाड़ कर रही है, उससे लोकतंत्र की मूल भावना पर आघात हो रहा है।

संशोधित सूची से पहले तेज हुई हलचल

आरक्षण सूची पर उठते सवालों ने प्रदेशभर की पंचायत राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि अगर आपत्तियों का समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष करेंगे। अब सबकी निगाहें 18 जून को जारी होने वाली संशोधित सूची पर टिकी हैं।

 

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