देहरादून (रोहित सोनी): भारत सरकार ने आगामी जातीय जनगणना की तारीखों की घोषणा कर दी है। यह जनगणना दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी, जिसमें पहला चरण अक्टूबर 2026 में और दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पहले चरण में रखा गया है। उत्तराखंड राज्य में भी जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी, जिसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
तीन पर्वतीय टाउन में पहले चरण की जनगणना
उत्तराखंड के तीन जिलों—उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली के क्रमशः गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ टाउन को पहले चरण में शामिल किया गया है। ये क्षेत्र स्नो-बाउंड यानी बर्फ से ढके रहते हैं, इसलिए यहां 11 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच जनगणना की जाएगी। यह चरण 150 गांवों को कवर करेगा।
दूसरे चरण में राज्य के बाकी हिस्सों की जनगणना
उत्तराखंड के अन्य हिस्सों में जनगणना का दूसरा चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। इसके बाद 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक जनगणना रिवीजन का काम होगा। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी, जिससे डेटा तेजी से और सटीकता के साथ संकलित किया जा सकेगा।
डिजिटल होगी जनगणना, मिलेगा इनसेंटिव
जनगणना के लिए इस बार डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जाएगा। प्रगणक मोबाइल या टैबलेट के माध्यम से घर-घर जाकर आंकड़े दर्ज करेंगे। अगर कोई कर्मचारी डिजिटल माध्यम से जनगणना करता है तो उसे अतिरिक्त इनसेंटिव भी दिया जाएगा। हालांकि विकल्प के रूप में पेपर फॉर्मेट की अनुमति भी दी गई है।
मकानों की गिनती पहले, फिर जनसंख्या गणना
जनगणना से पहले मई-जून 2026 के बीच मकान सूची और मकानों की गणना की जाएगी। इसके बाद फरवरी 2027 में जनसंख्या की गणना होगी। इस बार मकान सूची और जनसंख्या दोनों आंकड़ों को डिजिटली रिकॉर्ड किया जाएगा।
28 हजार कर्मचारियों की होगी जरूरत
जनगणना के लिए इस बार लगभग 28,000 कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। 2011 की जनगणना में यह संख्या 24,000 थी। बढ़ती जनसंख्या और डिजिटल प्रोसेस के चलते इस बार ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। इन सभी कर्मचारियों को दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जिलाधिकारी निभाएंगे मुख्य भूमिका
हर जिले में जिलाधिकारी को जिला जनगणना अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। तहसीलदार को चार्ज अधिकारी बनाया जाएगा और नगरीय क्षेत्रों में भी अलग अधिकारी तैनात होंगे। सुपरवाइजर और प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे।
जल्द आएगी रिपोर्ट
डिजिटल प्रणाली के कारण उम्मीद जताई जा रही है कि जनगणना की रिपोर्ट तेजी से तैयार होगी और अंतिम रिपोर्ट छह महीने के भीतर सार्वजनिक की जा सकेगी। यह पहली बार है जब भारत में इस स्तर की जनगणना डिजिटल रूप में की जा रही है, जिससे समय की बचत के साथ त्रुटियों में भी कमी आएगी।



