नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर स्थिति की गंभीर समीक्षा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की यह अहम बैठक दिल्ली स्थित पीएम आवास पर आयोजित की गई, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री शामिल हुए।
जवाबी कार्रवाई पर बन सकती है ठोस रणनीति
सूत्रों के अनुसार, बैठक में भारत की तरफ से संभावित जवाबी कदमों पर चर्चा हुई है और जल्द ही कड़ा फैसला लिया जा सकता है। गृह और रक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा एजेंसियों से घटनास्थल की रिपोर्ट, प्रारंभिक जांच और संबंधित खुफिया इनपुट साझा किए। बैठक में यह संकेत साफ था कि भारत इस हमले को लेकर अब चुप नहीं बैठेगा।
2019 के बाद सबसे बड़ा हमला
इससे पहले 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन क्षेत्र में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस वीभत्स हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। माना जा रहा है कि यह हमला 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
लश्कर-ए-तैयबा के संगठन TRF पर शक
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का हाथ हो सकता है। यह संगठन पहले भी घाटी में कई लक्षित हत्याओं और सुरक्षा बलों पर हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है।
सरकार का सख्त रुख
CCS की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराया गया। साथ ही, सीमा सुरक्षा, खुफिया तंत्र को मजबूत करने, और घुसपैठ रोकने के लिए रणनीतिक कदम उठाने पर भी मंथन हुआ। विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि पाकिस्तान की भूमिका उजागर की जा सके।
इस बैठक से यह साफ हो गया है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ और अधिक आक्रामक रुख अपनाने के लिए तैयार है और आतंकी हमलों के पीछे छिपे संगठनों को करारा जवाब देने में देर नहीं करेगा।


