उत्तराखंड

आसन झील में लौटे विदेशी मेहमान, प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गूंजा देहरादून का आसमान

Foreign visitors have returned to Asan Lake, and the skies of Dehradun are echoing with the chirping of migratory birds.

देहरादून जिले की प्रसिद्ध आसन झील इन दिनों रंग-बिरंगे विदेशी पक्षियों की मौजूदगी से जीवंत हो उठी है। सर्दियों की आहट के साथ ही झील का हर कोना प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गूंजने लगा है। झील की सतह पर उड़ते और पानी में तैरते इन विदेशी मेहमानों को देखने के लिए न केवल स्थानीय लोग, बल्कि देशभर से प्रकृति प्रेमी और पर्यटक बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं।


साइबेरिया से देहरादून तक 16 हजार किलोमीटर की यात्रा

चकराता वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाली आसन कंजर्वेशन वेटलैंड, जो कि एक रामसर साइट है, सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग बन जाती है। वन विभाग के अनुसार अब तक लगभग 17 से 18 प्रजातियों के करीब ढाई हजार पक्षी यहां पहुंच चुके हैं। इनमें सुर्खाब, पिंटेल, कॉमन टील, रेडक्रेस्ट पोचार्ड और ग्रेहेडेड लून जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ शामिल हैं।

ये पक्षी साइबेरिया, रूस, चीन, मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे क्षेत्रों से लगभग 16,000 किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर आसन झील तक पहुंचते हैं। ठंड बढ़ते ही ये पक्षी गर्म और सुरक्षित वातावरण की तलाश में भारत का रुख करते हैं, और आसन झील उनके लिए सबसे पसंदीदा पड़ावों में से एक है।


पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र

जैसे ही इन विदेशी मेहमानों का आगमन होता है, झील के किनारे पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफरों की भीड़ जुटने लगती है। सुबह की सुनहरी रोशनी में जब पक्षियों के झुंड झील की सतह पर उतरते हैं, तो दृश्य बेहद मनमोहक लगता है। स्थानीय गाइडों के अनुसार इस मौसम में झील आने वाले पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो जाती है, जिससे आसपास के लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलते हैं।


वन विभाग की सख्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था

पक्षियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने झील के आसपास विशेष गश्त और निगरानी व्यवस्था शुरू की है। वन दरोगा प्रदीप सक्सेना के अनुसार अक्टूबर से मार्च तक प्रवासी पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ती है और इस बार यह आंकड़ा पांच हजार तक पहुँचने की उम्मीद है। विभाग ने शिकारी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए विशेष टीम गठित की है जो नियमित गश्त कर रही है।


पर्यावरण और पर्यटन दोनों को मिला संबल

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति झील के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। इससे जल की गुणवत्ता सुधरती है और जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।

स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह मौसम किसी त्योहार से कम नहीं। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी झील के किनारे पक्षियों को देखने आते हैं। वहीं, वन विभाग आसन झील को इको-टूरिज्म मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।

इस सर्दी, आसन झील एक बार फिर साबित कर रही है कि जब प्रकृति को संरक्षित रखा जाए, तो वह अपनी सुंदरता और जीवन से पूरी धरती को रोशन कर देती है।

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